भारत

NDA विधायक का हेमंत सोरेन को कांग्रेस हटाने और नई सरकार का ऑफर!

Shantanu Roy
18 Jun 2026 7:29 PM IST
NDA विधायक का हेमंत सोरेन को कांग्रेस हटाने और नई सरकार का ऑफर!
x
बड़ी खबर
Jharkhand. झारखंड। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत और कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच NDA खेमे से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को नया राजनीतिक ऑफर दिए जाने की चर्चा ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। राज्यसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैद्यानाथ राम ने भी जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस को इस चुनाव में करारा झटका लगा है। कुल तीन उम्मीदवारों के बीच हुए मुकाबले में क्रॉस वोटिंग की वजह से समीकरण बदल गए और NDA समर्थित उम्मीदवार को फायदा मिला।

इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बाद NDA समर्थित JDU विधायक सरयू राय ने बड़ा बयान देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गठबंधन बदलने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि झारखंड में मौजूदा महागठबंधन में दरार आ चुकी है और यह कभी भी टूट सकता है। ऐसे में मुख्यमंत्री को कांग्रेस को सरकार से बाहर कर नई राजनीतिक व्यवस्था के साथ आगे बढ़ना चाहिए। सरयू राय ने यह भी कहा कि अगर झारखंड में बिना बीजेपी और बिना कांग्रेस के सरकार चलाई जाए, तो एक स्थिर और बेहतर प्रशासन संभव हो सकता है। उनके अनुसार, राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में बदलाव की संभावना बन रही है और कई विधायक इस दिशा में सोच सकते हैं।

उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार की जीत पहले से ही अपेक्षित थी और यह परिणाम राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का संकेत है। क्रॉस वोटिंग को लेकर भी उन्होंने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि गठबंधन के भीतर असंतोष मौजूद है। इस बयान के बाद झारखंड की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के भीतर भी स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के परिणाम के बाद गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं। हेमंत सोरेन सरकार के लिए यह स्थिति राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि विपक्ष लगातार दबाव बनाने की कोशिश में है। वहीं, JMM और कांग्रेस गठबंधन की स्थिरता को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। इस तरह के ऑफर और बयान झारखंड की राजनीति में अस्थिरता का संकेत हैं। हालांकि किसी भी बड़े राजनीतिक बदलाव के लिए विधानसभा में स्पष्ट बहुमत और समर्थन आवश्यक होगा।
Next Story