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दक्षिण एशिया का बड़ा लॉजिस्टिक हब बनेगा NCR, औद्योगिक विकास होगा तेज

HARRY
2 Sep 2021 1:28 AM GMT
दक्षिण एशिया का बड़ा लॉजिस्टिक हब बनेगा NCR, औद्योगिक विकास होगा तेज
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केंद्र सरकार दिल्ली-एनसीआर को लॉजिस्टिक हब के तौर पर विकसित करने की योजना पर काम रही है। इसमें एनसीआर के सभी औद्योगिक संस्थान व गतिविधियां एक-दूसरे पर निर्भर होंगे। वहीं, तैयार माल को बाजार में पहुंचाने के लिए सभी केंद्र परिवहन के तेज माध्यमों से जुड़ जाएंगे। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के रीजनल प्लान-2041 के ड्राफ्ट में इसका खाका पेश किया गया है। इसमें माना गया है कि एनसीआर दक्षिण एशिया का बड़ा हब बन सकता है। बशर्ते, अलग-अलग गतिविधियों के लिए जगह की पहचान कर बेहतर तरीके से नीतियों को लागू किया जाए।

रीजनल प्लान में पूरे एनसीआर को एक इकाई के तौर पर देखा गया है। इसमें लॉजिस्टिक हब का विकास होना है। इसके लिए वैश्विक मानकों के ड्राई पोर्ट, इंटरनेशनल कार्गो, कंटेनर डिपो सरीखी बुनियादी सुविधाएं विकसित होंगी। साथ ही सभी इलाकों को रेल, सड़क व हवाई परिवहन से जोड़ा जाएगा। खास बात यह कि हुनरमंद कर्मी तैयार करने के लिए स्किल सेंटर व तकनीकी संस्थान, पढ़ाई-लिखाई के लिए एजूकेशन सेंटर, इलाज के लिए हेल्थ केंद्र समेत दूसरे संस्थानों की स्थापना होगी। इससे न सिर्फ कारोबार की जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि मानवीय संसाधन का भी विकास होगा।
मंत्रालय अधिकारी के मुताबिक, प्लानिंग बोर्ड की बैठक में मंगलवार को इस पर चर्चा हुई थी। रीजनल प्लान में इन योजनाओं के लिए जगह की पहचान करने की जिम्मेदारी राज्यों पर डाली गई है। वहीं, पूरे एनसीआर का मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक इंटीग्रेशन होना है। इससे औद्योगिक इकाइयों में तैयार होने वाले उत्पादों को देश-विदेश में पहुंचाना आसान रहेगा। वहीं, दक्षिण एशिया में एनसीआर की लॉजिस्टिक हब के तौर पर नई पहचान भी मिलने की उम्मीद है। बोर्ड की अगली बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। इसमें रीजनल प्लान का ड्राफ्ट रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इस पर आगे का काम होगा।
जेवर और हिसार से एकीकरण की शुरुआत
रीजनल प्लान में कहा गया है कि एनसीआर के बेतरतीब विकास के बजाय जमीन की उपलब्धता के मुताबिक नई परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इनमें ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक पर खास तवज्जो मिलेगी। इन क्षेत्रों में प्रस्तावित औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन को भी बढ़ावा मिल सके। फिलहाल, उत्तर प्रदेश के जेवर और हरियाणा के हिसार इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आसपास के क्षेत्रों को एकीकृत किया जाएगा। इसके लिए ऐसे प्राधिकरण या बोर्ड की आवश्यकता होगी ताकि सभी परियोजनाओं को एक ही छत के नीचे मंजूरी मिल सके। इससे परियोजनाओं के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने में देरी नहीं होगी।
औद्योगिक विकास होगा तेज
लॉजिस्टिक हब तैयार होने से औद्योगिक विकास की रफ्तार में तेजी आएगी। मांग के मुताबिक उत्पाद तैयार होंगे। इनको एक जगह से दूसरी जगह तक आसानी से भेजना भी संभव होगा। औद्योगिक उत्पादों का निर्यात करना सुलभ होने सहित विदेशी मुद्रा में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। ड्राफ्ट रीजनल प्लान-2041 में दिल्ली-एनसीआर के नजदीकी शहरों को संभावनाओं के लिहाज से रिंग मानते हुए परियोजनाओं के लिए मसौदा तैयार किया गया है। जमीन की सीमित उपलब्धता और बेतरतीब विकास को एक ही एजेंसी के तहत अमली जामा पहनाया जाएगा, ताकि कम से कम जमीन में गुणवत्ता सुविधाएं मुहैया की जा सकें।
प्रतिस्पर्धी कीमत पर होगी ढुलाई
लॉजिस्टिक हब में वेयर हाउस, ड्राई पोर्ट, कार्गो और कंटेनर डिपो सहित अन्य सुविधाएं भी होंगी। मौजूदा इंडस्ट्रियल पार्कों में तैयार होने वाले उत्पादों को की ढुलाई आसान होगी। रेल, वायुमार्ग के अलावा बंदरगाहों तक भी उत्पादों की ढुलाई के लिए सभी विकल्प मुहैया होंगे। इससे वक्त की मांग के मुताबिक उत्पादों की आपूर्ति की जा सके। एयर कार्गो टर्मिनल, रेल और सड़क परिवहन की सुविधाएं विकसित होने से देश विदेश में भी उत्पादों को प्रतिस्पर्धी कीमत पर भेजना संभव होगा।
होगा स्किल हब, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
मास्टर प्लान के मुताबिक, थीम पार्क, मेडिसिटी, टेक सिटी, एजुसिटी के अलावा एमएसएमई क्लस्टर के विकास के लिए प्रावधान जरूरी होगा। लॉजिस्टिक हब के बनने से दूसरी परियोजनाओं के विकास की गति भी तेज होगी। अलग-अलग इकाइयों में हुनरमंद कामगारों को प्रशिक्षण देने के लिए स्किलिंग हब भी विकसित करने का मसौदा भी प्रस्ताव है। इससे अलग अलग क्षेत्रों की जरूरत के मुताबिक हुनरमंद कामगारों को तैयार किया जाएगा। इससे रोजगार की संभावनाएं बढ़ने के साथ साथ अर्थव्यवस्था भी बेहतर होगी।
प्लग एंड प्ले के तहत लीज पर मिलेगी जमीन
जमीन की कम उपलब्धता के बावजूद प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए प्लग एंड प्ले के तहत औद्योगिक इकाइयों को लीज पर जमीन दी जाएगी। इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन पहले की तरह लीज की अवधि 30-90 वर्ष के बजाय 5-10 वर्ष की होगी। इससे वैश्विक स्तर पर होने वाले औद्योगिक उत्पादों की मांग को पूरा करना भी आसान होगा। अलग-अलग क्लस्टर के विकसित होने से औद्योगिक विकास की रफ्तार में भी तेजी आएगी। इन इकाइयों में तैयार होने वाले उत्पादों की आपूर्ति को सुविधाजनक बनाने के लिए ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे से भी कनेक्टिविटी होगी।
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