भारत

NCR Noida: 2041 मास्टर प्लान में नया नोएडा को अबू धाबी जैसा बनाने की योजना

Admindelhi1
10 March 2026 11:08 AM IST
NCR Noida: 2041 मास्टर प्लान में नया नोएडा को अबू धाबी जैसा बनाने की योजना
x
"नया नोएडा के मास्टर प्लान में उद्योग और आबादी का बड़ा विस्तार"

नोएडा: उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर और बुलंदशहर के बीच बसने वाला 'नया नोएडा' (Naya Noida Master Plan 2041) (दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र – DNGIR) भविष्य का सबसे आधुनिक औद्योगिक शहर बनने जा रहा है। इसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है।

औद्योगिक हब… 3 हजार फैक्ट्रियां और 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्र

नया नोएडा करीब 21,000 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैला होगा। मास्टर प्लान 2041 के अनुसार, इसका सबसे बड़ा हिस्सा यानी 8,811 हेक्टेयर क्षेत्र केवल उद्योगों के लिए आरक्षित किया गया है। यहां लगभग 3,000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी, जिससे यह क्षेत्र निवेश का ग्लोबल हब बनेगा। इस नए शहर की अनुमानित आबादी करीब 6 लाख होगी। खास बात यह है कि इसमें से 3.5 लाख लोग माइग्रेंट (प्रवासी) होंगे, जो यहाँ के उद्योगों में काम करने के लिए आएंगे। आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 2,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन का उपयोग किया जाएगा।

ईडब्ल्यूएस से लेकर एचआईजी फ्लैट्स तक

यहां हर आय वर्ग के लिए घर उपलब्ध होंगे। मास्टर प्लान में चार कैटेगरी और तीन टाइप के मकानों का प्रस्ताव है…

EWS (आर्थिक रूप से कमजोर): 18.1 हेक्टेयर क्षेत्र।

LIG (निम्न आय वर्ग): 40.8 हेक्टेयर क्षेत्र।

MIG (मध्यम आय वर्ग): 29.9 हेक्टेयर क्षेत्र।

HIG (उच्च आय वर्ग): 1.8 हेक्टेयर क्षेत्र।

पानी और पर्यावरण: गंगाजल और झीलों का संगम

शहर की प्यास बुझाने के लिए 300 MLD पानी की व्यवस्था की जाएगी, जिसमें गंगाजल और भूजल का मिश्रण होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए मास्टर प्लान में खास प्रावधान हैं…

झीलों और नहरों का निर्माण: 58.96 हेक्टेयर में लेक और 91.75 हेक्टेयर में कैनाल बनाई जाएंगी।

जल संचयन: गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए वेटलैंड विकसित किए जाएंगे।

वाटर सप्लाई: कुल पानी में से 212 MLD उद्योगों को और 85 MLD घरेलू उपयोग के लिए दिया जाएगा।

80 गांवों की जमीन पर 'लैंड पूल' मॉडल

नया नोएडा को बुलंदशहर और दादरी के 80 गांवों की जमीन पर बसाया जा रहा है। यहां जमीन का अधिग्रहण 'लैंड पूलिंग' नीति के जरिए किया जाएगा, जिससे किसानों को भी शहर के विकास में भागीदार बनाया जा सके।

Next Story