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एनसीबी ने गुप्त लैब और करोड़ों की बरामदगी की
Bengaluru बेंगलुरु। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने कर्नाटक के मैसूरु में एक बड़े अंतर-राज्यीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट और एक गुप्त ड्रग निर्माण लैब का भंडाफोड़ किया है। एनसीबी ने शुक्रवार को जारी आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी। बयान के अनुसार, अब तक की कार्रवाई में करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य के ड्रग्स, 25.6 लाख रुपये नकद, एक टोयोटा फॉर्च्यूनर वाहन और 500 किलोग्राम से अधिक रसायन जब्त किए गए हैं। एनसीबी ने बताया कि मैसूरु के हेब्बल औद्योगिक क्षेत्र में स्थित उस यूनिट को सील कर दिया गया है, जहां अवैध ड्रग निर्माण लैब चल रही थी। फॉरेंसिक टीम द्वारा इसकी जांच की जाएगी। एनसीबी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नशा मुक्त भारत’ के विजन और केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देशों के तहत यह कार्रवाई की गई है, जिसके तहत एक बड़े अंतर-राज्यीय ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
खुफिया जानकारी के आधार पर 28 जनवरी को गुजरात के सूरत जिले के पलसाना में कर्नाटक नंबर की एक टोयोटा फॉर्च्यूनर एसयूवी को रोका गया। वाहन की तलाशी के दौरान करीब 35 किलोग्राम मेफेड्रोन (एमडी) बरामद किया गया। इसके बाद पलसाना के दस्तान रेजीडेंसी में नेटवर्क के मास्टरमाइंड महेंद्र कुमार विश्नोई के घर पर छापा मारा गया, जहां से 1.8 किलोग्राम अफीम, 25.6 लाख रुपये नकद और विभिन्न रसायन बरामद किए गए। यह कार्रवाई सूरत पुलिस के सहयोग से की गई।
एनसीबी ने बताया कि राजस्थान में आगे वितरण के लिए ड्रग्स ले जा रहे मास्टरमाइंड महेंद्र कुमार विश्नोई समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि महेंद्र कुमार विश्नोई पहले भी अफीम और स्मैक की तस्करी में शामिल रहा है। एनडीपीएस मामले में जेल में बंद रहने के दौरान उसने अन्य कैदियों से बातचीत के जरिए सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण का विचार बनाया। जेल में रहते हुए उसने सिंथेटिक नशीले पदार्थों के निर्माण की प्रक्रिया, बाजार की मांग और सप्लाई चेन की जानकारी हासिल की, जिसे जमानत पर बाहर आने के बाद उसने कर्नाटक के मैसूरु में एक गुप्त लैब स्थापित कर अमल में लाया।
मैसूरु के हेब्बल औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इस यूनिट में एनसीबी की तलाशी के दौरान ड्रग निर्माण के लिए अत्याधुनिक उपकरणों से लैस एक पूरी तरह सक्रिय अवैध लैब पाई गई। एनसीबी के अनुसार, इस यूनिट को सफाई से जुड़े रसायनों के निर्माण के नाम पर चलाया जा रहा था। यह परिसर मास्टरमाइंड के एक रिश्तेदार और सह-आरोपी ने किराए पर लिया था, जिसे भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
एनसीबी ने बताया कि अब तक गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी राजस्थान के जालौर जिले के रहने वाले हैं। आगे की जांच में ड्रग कार्टेल के अन्य सदस्यों की पहचान और लैब में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों व रसायनों की सप्लाई चेन का पता लगाया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया है कि महेंद्र कुमार विश्नोई एक आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ राजस्थान में तीन और गुजरात में एक मामला दर्ज है। जानकारी के अनुसार, यह गुप्त लैब वर्ष 2024 में स्थापित की गई थी और इसके बाद से आरोपी कई बार ड्रग्स का निर्माण और वितरण कर चुका है।
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