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होटल के कमरे में मिला Navy के जवान का शव, तफ्तीश में जुटी पुलिस

SHIDDHANT
1 Dec 2025 8:31 PM IST
होटल के कमरे में मिला Navy के जवान का शव, तफ्तीश में जुटी पुलिस
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मामले की छानबीन जारी
West Bengal पश्चिम बंगाल: चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले चुनाव आयोग (ईसीआई) ने अपना हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में आयोग ने कहा कि एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर वोटर डिलीशन का दावा अतिशयोक्ति पर आधारित है और इसका राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर संवैधानिक और नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, जो दशकों से जारी है। 24 जून और 27 अक्टूबर 2025 के आदेश पूरी तरह वैध हैं।

चुनाव आयोग ने कहा कि मतदाता सूची का सटीक और साफ-सुथरा निर्माण उसका संवैधानिक दायित्व है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने टीएन शेषन केस (1995) में मान्यता दी थी। आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धाराओं 15, 21 और 23 का हवाला देते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का अधिकार जताया। बिहार के बाद अब देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कराया जा रहा है। इस प्रक्रिया में मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा है। नए वोटरों को शामिल किया जा रहा है, जबकि मृतक, दूसरी जगह बसने वाले और अवैध रूप से राज्य में आए मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।

वहीं, संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन विपक्ष एसआईआर पर चर्चा की मांग करता रहा। संसद के बाहर भी विपक्ष ने सरकार को घेरने का प्रयास किया। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म करने में लगी है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, "सरकार ने देश में नीति और गणतंत्र को खत्म कर दिया है। पहले जनता तय करती थी कि कौन सरकार बनाएगा, अब चुनाव आयोग तय कर रहा है कि कौन मतदाता बनेगा।

बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने आईएएनएस से कहा कि सरकार संपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है। उन्होंने विपक्ष से कहा कि डरने की जरूरत नहीं, बल्कि हिम्मत से इसका सामना करना चाहिए। इस प्रकार, पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट और संसद दोनों स्तरों पर राजनीतिक और संवैधानिक बहस जारी है, जहां चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया की वैधता पर जोर दे रहा है, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ मान रहा है।
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