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16 लाख KM दूर NASA का नया ‘शिकारी’, दूसरी दुनिया और ब्रह्मांड के राज खोलेगा Roman Telescope

SHIDDHANT
31 Aug 2026 12:23 AM IST
16 लाख KM दूर NASA का नया ‘शिकारी’, दूसरी दुनिया और ब्रह्मांड के राज खोलेगा Roman Telescope
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16 लाख KM दूर से करेगा ब्रह्मांड का सबसे बड़ा सर्वे
Delhi दिल्ली: अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्यों को समझने की दिशा में NASA ने एक और बड़ा कदम उठाया है। NASA का अत्याधुनिक रोमन स्पेस टेलीस्कोप अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गया है। इस मिशन का मकसद दूसरे तारों के आसपास मौजूद ग्रहों की खोज करना, रहस्यमयी डार्क एनर्जी का अध्ययन करना और ब्रह्मांड का अब तक का सबसे व्यापक सर्वेक्षण करना है। नासा की विज्ञान मिशन निदेशक निक्की फॉक्स के मुताबिक, रोमन स्पेस टेलीस्कोप हजारों सुपरनोवा, दसियों हजार ग्रहों, अरबों आकाशगंगाओं और खरबों तारों का अध्ययन करने में सक्षम होगा। इसका विशाल दृश्य क्षेत्र वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के ऐसे हिस्सों को देखने में मदद करेगा, जिनका अध्ययन मौजूदा दूरबीनों से बेहद मुश्किल है।
16 लाख किलोमीटर दूर होगी तैनाती
स्पेसएक्स के फाल्कन हेवी रॉकेट से लॉन्च किया गया यह टेलीस्कोप करीब 16 लाख किलोमीटर दूर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा है। वहां यह नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के साथ अंतरिक्ष के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र से ब्रह्मांड का अध्ययन करेगा। रोमन टेलीस्कोप का नाम नासा की पहली प्रमुख खगोलशास्त्री नैंसी ग्रेस रोमन के सम्मान में रखा गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसे अपने निर्धारित स्थान तक पहुंचने में तीन महीने से ज्यादा समय लग सकता है। इसके बाद यह ब्रह्मांड का विशाल सर्वेक्षण शुरू करेगा। रोमन का सबसे बड़ा फायदा इसका विशाल फील्ड ऑफ व्यू है। इसका दृश्य क्षेत्र हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में 100 गुना से भी अधिक बड़ा है।
हबल से कहीं तेज होगा सर्वेक्षण
रोमन की एक बड़ी खासियत इसकी गति है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक महीने में जितने मिल्की वे के अवलोकन कर सकती है, उतना काम हबल को पूरा करने में करीब एक सदी लग सकता है। इससे वैज्ञानिकों को कम समय में अंतरिक्ष के विशाल हिस्से का नक्शा तैयार करने में मदद मिलेगी। टेलीस्कोप में अत्याधुनिक इन्फ्रारेड कैमरा लगाया गया है। इसकी संवेदनशीलता हबल जैसी होने के बावजूद यह बहुत तेजी से काम कर सकेगा। रोमन हमारी आकाशगंगा के केंद्र का भी अब तक का बेहद विस्तृत और गहरा अध्ययन करने में मदद करेगी।
दूसरे ग्रहों की भी होगी तलाश
रोमन मिशन का एक अहम लक्ष्य हमारे सौर मंडल के बाहर मौजूद ग्रहों यानी एक्सोप्लैनेट्स की खोज करना है। इसके उपकरण तारों की तेज रोशनी को रोकने में मदद करेंगे, जिससे वैज्ञानिक उनके आसपास मौजूद अपेक्षाकृत मंद ग्रहों का अध्ययन कर सकेंगे। इसके अलावा रोमन वैज्ञानिकों को डार्क मैटर और डार्क एनर्जी को समझने में नई जानकारी दे सकती है। माना जाता है कि ब्रह्मांड का बड़ा हिस्सा इन्हीं रहस्यमयी घटकों से जुड़ा है, लेकिन इनके बारे में अभी भी कई सवाल अनसुलझे हैं। रोमन से मिलने वाले विशाल आंकड़ों को जेम्स वेब और हबल जैसे मिशनों के साथ मिलाकर वैज्ञानिक ब्रह्मांड के विस्तार, आकाशगंगाओं के विकास और ग्रहों की उत्पत्ति को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश करेंगे। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह मिशन अंतरिक्ष विज्ञान में कई नई खोजों का रास्ता खोल सकता है।
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