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पंचतत्व में विलीन हुए नाना पाटेकर, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

SHIDDHANT
9 Oct 2026 12:13 AM IST
पंचतत्व में विलीन हुए नाना पाटेकर, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
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PUNE पुणे। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर को पुणे ग्रामीण के डोंजे गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने पिता को मुखाग्नि दी। नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में गोवा में निधन हो गया था। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर पुणे के डोंजे गांव लाया गया, जहां उन्हें अंतिम विदाई दी गई। नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता की अंतिम विदाई के अवसर पर उनके फिल्मी सफर और सामाजिक कार्यों को याद किया गया।



नाना पाटेकर ने अपने लंबे अभिनय करियर में कई ऐसे किरदार निभाए, जिन्होंने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। उनकी दमदार आवाज, संवाद बोलने का अलग अंदाज और गंभीर भूमिकाओं में प्रभावशाली अभिनय उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाता था। उन्होंने हिंदी फिल्मों के साथ मराठी सिनेमा, थिएटर और टेलीविजन में भी काम किया। उनका अभिनय केवल एक विशेष प्रकार के किरदार तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने गंभीर, भावनात्मक और अलग-अलग स्वभाव वाले किरदारों को अपनी अदाकारी से जीवंत किया।
नाना पाटेकर की चर्चित फिल्मों में 'परिंदा', 'प्रहार: द फाइनल अटैक', 'क्रांतिवीर', 'अग्निपथ', 'अब तक छप्पन' और 'नटसम्राट' शामिल हैं। इन फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया। फिल्म 'क्रांतिवीर' में उनके दमदार संवाद और अभिनय को विशेष पहचान मिली। वहीं, 'अब तक छप्पन' में उनका किरदार दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुआ। मराठी फिल्म 'नटसम्राट' में उन्होंने एक ऐसे कलाकार की भूमिका निभाई, जिसके जीवन में कई भावनात्मक उतार-चढ़ाव आते हैं।
अपने शानदार अभिनय के लिए नाना पाटेकर को तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान भी प्रदान किया था। नाना पाटेकर का अभिनय सफर रंगमंच से शुरू हुआ था। फिल्मों में सफलता हासिल करने के बाद भी उन्होंने थिएटर से अपना जुड़ाव बनाए रखा। अभिनय के अलावा उन्होंने फिल्म निर्देशन में भी काम किया। उन्होंने 'प्रहार: द फाइनल अटैक' का निर्देशन किया था।
नाना पाटेकर की पहचान केवल एक सफल अभिनेता के रूप में नहीं थी। वह सामाजिक कार्यों और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए भी जाने जाते थे। विशेष रूप से किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर उनकी सक्रियता चर्चा में रही। उन्होंने अपने अभिनय के जरिए मनोरंजन के साथ समाज से जुड़े विषयों को भी पर्दे पर प्रस्तुत किया। उनकी कई फिल्मों में सामाजिक परिस्थितियों, मानवीय संवेदनाओं और संघर्ष की झलक दिखाई देती है।
गुरुवार को उनके निधन की जानकारी सामने आने के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और निर्देशकों ने उनके अभिनय तथा व्यक्तित्व को याद किया। नाना पाटेकर के पार्थिव शरीर को गोवा से पुणे ग्रामीण के डोंजे गांव लाया गया। यहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। बेटे मल्हार पाटेकर ने उन्हें मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। नाना पाटेकर भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए किरदार और यादगार संवाद भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा जीवित रहेंगे। हिंदी और मराठी फिल्मों में उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी।
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