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पश्चिम एशिया संकट से Mumbai का पुराना मछली बंदरगाह प्रभावित

Harrison
8 April 2026 7:47 PM IST
पश्चिम एशिया संकट से Mumbai का पुराना मछली बंदरगाह प्रभावित
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Mumbai मुंबई: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के तटीय कारोबार पर भी दिखने लगा है। मुंबई का सबसे पुराना मछली पकड़ने वाला प्रमुख पोर्ट इन दिनों लगभग ठप पड़ गया है। समुद्री गतिविधियों में आई कमी के कारण यहां काम करने वाले मछुआरों और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया क्षेत्र में हालिया संकट के चलते समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका सीधा असर मछली पकड़ने और निर्यात से जुड़े कारोबार पर पड़ा है। मछुआरों का कहना है कि सुरक्षा कारणों और बढ़ती लागत के चलते कई नावें समुद्र में नहीं जा पा रही हैं, जिससे रोज़गार प्रभावित हुआ है।
स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक, पहले जहां इस पोर्ट से रोजाना बड़ी मात्रा में मछली की आपूर्ति होती थी, वहीं अब गतिविधियां काफी कम हो गई हैं। निर्यात पर भी असर पड़ा है, क्योंकि कई अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट देरी का सामना कर रहे हैं। इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है।
मछुआरों ने बताया कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और समुद्र में सुरक्षा को लेकर चिंता के कारण काम करना मुश्किल हो गया है। कई मछुआरे फिलहाल समुद्र में जाने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक कारोबार पूरी तरह पटरी पर लौटना मुश्किल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री व्यापार और मछली उद्योग पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्थिरता ऐसे संकटों के दौरान सबसे अधिक प्रभावित होती है।
स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने कहा है कि मछुआरों और व्यापारियों को हर संभव सहायता देने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर समुद्री गतिविधियों को सुरक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है।
व्यापार से जुड़े लोगों ने सरकार से राहत उपायों की मांग की है। उनका कहना है कि इस संकट के कारण उनकी आय पर सीधा असर पड़ा है और यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो छोटे कारोबारियों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
मछली उद्योग से जुड़े संगठनों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह क्षेत्र हजारों लोगों के रोज़गार से जुड़ा है और इसके प्रभावित होने से व्यापक आर्थिक असर पड़ सकता है।
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