भारत

MP में सड़क नेटवर्क को मिलेगा बड़ा विस्तार, 7 हाईटेक सड़कें ₹18,675 करोड़ की परियोजना से बनेंगी

Tara Tandi
1 Jun 2026 5:48 PM IST
MP में सड़क नेटवर्क को मिलेगा बड़ा विस्तार, 7 हाईटेक सड़कें ₹18,675 करोड़ की परियोजना से बनेंगी
x

MP. मध्य प्रदेश | मध्य प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर योजना तैयार की गई है। भोपाल ईस्टर्न बायपास सहित प्रदेश की सात प्रमुख सड़क परियोजनाओं को हाईटेक स्वरूप में विकसित किया जाएगा। इन सभी परियोजनाओं को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत बनाया जाएगा। इसके लिए मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति को प्रस्ताव भेज दिया है।

इन परियोजनाओं की कुल लंबाई लगभग 489 किलोमीटर बताई गई है, जबकि अनुमानित लागत करीब ₹18,675 करोड़ है। स्वीकृति मिलने के बाद इन परियोजनाओं पर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
इन सड़कों में कटनी-दमोह फोर लेन, ईस्टर्न भोपाल बायपास छह लेन, सिवनी-बालाघाट फोर लेन, मंदसौर-सीतामऊ फोर लेन, मेलुआ चौराहा से मालथौन फोर लेन, तिलवारी-हरदी-जनकपुरी टू लेन और देवास-चापड़ा टू लेन शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य में कनेक्टिविटी को बेहतर करना और यातायात को सुगम बनाना है।
क्या है हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM)?
हाइब्रिड एन्युटी मॉडल केंद्र सरकार द्वारा लागू एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल है, जिसे वर्ष 2016 में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य निजी निवेशकों का जोखिम कम करना और अधूरी या धीमी परियोजनाओं को तेजी देना है।
इस मॉडल में परियोजना की कुल लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करती है, जबकि 60 प्रतिशत निवेश निजी डेवलपर करता है। निर्माण पूरा होने के बाद सरकार चरणबद्ध तरीके से निजी कंपनी को उसकी लागत ब्याज सहित वापस करती है। यह भुगतान 15 से 20 वर्षों तक छमाही किस्तों में किया जाता है।
इस मॉडल की खास बात यह है कि सड़क बनने के बाद टोल वसूली का अधिकार निजी कंपनी के पास नहीं रहता। टोल संग्रह पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में होता है। इससे राजस्व व्यवस्था सरकार के हाथ में रहती है और पारदर्शिता बढ़ती है।
टोल व्यवस्था और लाभ
सरकार अब खुद टोल टैक्स वसूलेगी और उसी के माध्यम से परियोजना में किए गए निवेश की भरपाई करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मॉडल से निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित होगी और बड़े प्रोजेक्ट समय पर पूरे हो सकेंगे। इससे प्रदेश में सड़क संपर्क बेहतर होगा और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
Next Story