भारत

रूसी तेल को लेकर अमेरिका के दावे खारिज, मॉस्को ने कहा–भारत का रुख कायम

SHIDDHANT
4 Feb 2026 9:04 PM IST
रूसी तेल को लेकर अमेरिका के दावे खारिज, मॉस्को ने कहा–भारत का रुख कायम
x
Moscow मॉस्को: रूस ने अमेरिका द्वारा भारत के रूसी तेल खरीदने के रुख को लेकर लगाए गए दावों को खारिज कर दिया है। मॉस्को ने स्पष्ट किया कि भारत के निर्णय में कोई बदलाव नहीं हुआ है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार दोनों के लिए लाभकारी और स्थिरता बनाए रखने वाला है। रूसी विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि उनके पास ऐसा कोई संकेत नहीं है जिससे यह मान लिया जाए कि भारत ने रूसी कच्चे तेल को लेकर अपना रुख बदल लिया है। मंत्रालय ने दोहराया कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार पारस्परिक लाभकारी है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने दावा किया था कि अमेरिका और भारत के बीच हुई हालिया बातचीत के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से कच्चे तेल के आयात को बढ़ाने पर सहमति जताई है। लेविट ने यह भी कहा कि यह सहमति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद बनी। रूस ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका का कथन वास्तविकता के विपरीत है। रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के बयान को “बिना आधार” करार देते हुए कहा कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंधों में स्थिरता और पारदर्शिता बनी हुई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते लंबी अवधि और रणनीतिक दृष्टिकोण पर आधारित हैं, जिन्हें किसी एक देश की दबाव नीति से प्रभावित नहीं किया जा सकता।
विश्लेषकों के अनुसार, भारत का रूसी तेल खरीदने का रुख कई कारणों से महत्वपूर्ण है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतें, कीमतों में स्थिरता, तथा रूस के साथ लंबे समय से बने व्यापारिक संबंध इसे एक मजबूत विकल्प बनाते हैं। रूस की तरफ से बयान आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक दबावों से प्रभावित नहीं किया जा सकता। अमेरिका का दावा कई वैश्विक विश्लेषकों द्वारा अनसत्य और प्रचारित बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विविध स्रोतों से तेल आयात करता रहा है और रूस के साथ यह साझेदारी रणनीतिक और आर्थिक रूप से लाभकारी है। इसके अलावा, भारत और रूस के बीच लंबे समय से ऊर्जा व्यापार की परंपरा रही है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में संतुलन बनाए रखने में सहायक रही है।
इस विवाद के बीच भारत ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है, लेकिन रूसी विदेश मंत्रालय के बयान से यह साफ हो गया है कि भारत का रुख unchanged है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध मजबूत और निरंतर बने रहेंगे। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारत और रूस के सहयोग से तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है और यह दोनों देशों के आर्थिक हितों के लिए भी लाभकारी साबित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस सहयोग से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में संतुलन और विश्वसनीयता बनी रहती है।
Next Story