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KERALA केरल: केरल में हालिया स्थानीय निकाय उपचुनावों के बाद सत्तारूढ़ UDF और विपक्षी LDF के बीच वोटों के रुझान को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। CPI(M) विधायक और नेता पी.ए. मोहम्मद रियास ने बूथ स्तर के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया है कि विधानसभा चुनाव में UDF को वोट देने वाले मतदाताओं के एक हिस्से ने बाद के चुनाव में LDF के पक्ष में मतदान किया है। रियास के अनुसार, विधानसभा चुनाव के कुछ महीने बाद हुए चुनावी परिणामों का बूथ स्तर पर विश्लेषण करने पर सामने आता है कि औसतन हर बूथ पर करीब 40 ऐसे मतदाता हैं, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में UDF को वोट दिया था, लेकिन बाद में LDF के पक्ष में मतदान किया। उन्होंने कहा कि एक विधानसभा क्षेत्र में औसतन करीब 200 बूथ होते हैं। हालांकि, यह आंकड़ा रियास के राजनीतिक विश्लेषण और दावे के तौर पर सामने आया है; उपलब्ध आधिकारिक चुनावी आंकड़ों में इस तरह के वोट-स्थानांतरण की पुष्टि अलग से नहीं की गई है।
रियास का यह बयान ऐसे समय आया है, जब केरल में विधानसभा चुनाव के बाद हुए स्थानीय निकाय उपचुनावों में UDF और LDF के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा। 29 सितंबर को घोषित 38 स्थानीय निकाय सीटों के परिणामों में UDF ने 19 और LDF ने 18 सीटें जीतीं। वहीं, परिणामों में LDF ने UDF से कुछ सीटें भी छीनीं। त्रिशूर जिले में हालांकि तस्वीर राज्यव्यापी नतीजों से अलग रही। यहां पांच स्थानीय निकाय सीटों पर हुए उपचुनाव में UDF ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि LDF को दो सीटें मिलीं। UDF ने चेलक्कारा के कुरुमाला वार्ड में भी जीत हासिल की, जिसे लंबे समय से CPI(M) का मजबूत क्षेत्र माना जाता रहा है।
रियास ने इससे पहले कोझिकोड कॉरपोरेशन के कुट्टीचिरा वार्ड के उपचुनाव का भी उल्लेख किया था। यहां UDF उम्मीदवार ने जीत दर्ज की, लेकिन जीत का अंतर पिछले चुनाव के 2,273 वोट से घटकर 436 वोट रह गया। रियास ने इसे इस बात का संकेत बताया कि पारंपरिक UDF मतदाताओं के कुछ हिस्से ने LDF को वोट दिया। केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 13 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 2,839 मतदान केंद्र त्रिशूर जिले में हैं। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में बूथों की संख्या 191 से 235 के बीच है। इस तरह रियास का बूथ स्तर का दावा आगामी राजनीतिक मुकाबलों के संदर्भ में LDF के लिए संभावित वोट बदलाव की उनकी व्याख्या को सामने रखता है, जबकि हालिया उपचुनावों के वास्तविक परिणाम दोनों मोर्चों के बीच करीबी मुकाबले को दर्शाते हैं।
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