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भ्रामक विज्ञापन केस: बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, नाराजगी जताते कही ये बात

jantaserishta.com
2 April 2024 6:09 AM GMT
भ्रामक विज्ञापन केस: बाबा रामदेव को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, नाराजगी जताते कही ये बात
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फाइल फोटो 

पतंजलि के वकील ने भ्रामक विज्ञापन को लेकर कहा कि हमारे मीडिया विभाग को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं थी।
नई दिल्ली: भ्रामक विज्ञापन के मामले में पतंजलि आयुर्वेद को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई थी और योग गुरु रामदेव एवं कंपनी के एमडी आचार्य बालकृष्ण को पेशी पर बुलाया था। आज रामदेव और बालकृष्ण दोनो ंही शीर्ष अदालत पहुंचे। इस दौरान सुनवाई शुरू हुई तो बाबा रामदेव के वकील ने कहा कि हम ऐसे विज्ञापन के लिए माफी मांगते हैं। आपके आदेश पर खुद योग गुरु रामदेव अदालत आए हैं। पतंजलि आयुर्वेद के वकील ने कहा कि बाबा रामदेव खुद अदालत में हैं। वह माफी मांग रहे हैं और आप उनकी माफी को रिकॉर्ड में दर्ज कर सकते हैं।
बाबा रामदेव के वकील ने कहा, 'हम इस अदालत से भाग नहीं रहे हैं। क्या मैं यह कुछ पैराग्राफ पढ़ सकता हूं? क्या मैं हाथ जोड़कर यह कह सकता हूं कि जेंटलमेन खुद अदालत में मौजूद हैं और अदालत उनकी माफी को दर्ज कर सकती है।' सुनवाई के दौरान पतंजलि के वकील ने भ्रामक विज्ञापन को लेकर कहा कि हमारे मीडिया विभाग को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं थी। इसलिए ऐसा विज्ञापन चला गया। इस पर बेंच में शामिल जस्टिस अमानुल्लाह और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि आपको इसकी जानकारी नहीं थी।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में ही पतंजलि को आदेश दिया था कि वह भ्रामक दावे करने वाले विज्ञापनों को वापस ले। यदि ऐसा नहीं किया गया तो फिर हम ऐक्शन लेंगे। ऐसी स्थिति में पतंजलि के हर गलत विज्ञापन पर 1 करोड़ रुपये का फाइन लगाया जाएगा।
इस दौरान जस्टिस अमानुल्ला ने यह भी कहा कि बाबा रामदेव ने योग के मामले में बहुत अच्छा काम किया है। लेकिन एलोपैथी दवाओं को लेकर ऐसे दावे करना ठीक नहीं है। वहीं IMA के वकील ने कहा कि वह अपना विज्ञापन करें, लेकिन उसमें एलोपैथी चिकित्सा पद्धति की बेवजह आलोचना नहीं होनी चाहिए। केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस हिमा कोहली ने केंद्र सरकार की भी खिंचाई की। उन्होंने कहा कि हमें हैरानी है कि आखिर इस मामले में केंद्र सरकार ने अपनी आंखें क्यों बंद रखीं।
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