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समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी सहायता प्रदान की
Delhi दिल्ली। भारत और वियतनाम के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के उद्देश्य से सोमवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वियतनाम के विदेश मंत्री ले होई चुंग से मुलाकात की। यह दोनों नेताओं के बीच पहली औपचारिक बैठक थी, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने तथा आर्थिक सहयोग को गहराई देने पर विस्तृत चर्चा हुई। डॉ. जयशंकर ने अपनी मुलाकात की जानकारी ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर साझा करते हुए लिखा— “A first meeting with FM Le Hoai Trung of Vietnam. Discussed deepening of our Strategic partnership and bilateral economic engagement.” यानी यह हमारी पहली बैठक थी, जिसमें भारत-वियतनाम की रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की गई।
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच हुई इस वार्ता में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता, और आपसी कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। भारत और वियतनाम लंबे समय से ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘इंडो-पैसिफिक विजन’ के तहत क्षेत्रीय शांति और विकास में भागीदार रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग बीते कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुआ है। भारत ने वियतनाम को रक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी सहायता प्रदान की है। वहीं, वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार माना जाता है, जो आसियान देशों के साथ भारत के रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आर्थिक मोर्चे पर भी भारत और वियतनाम के बीच व्यापारिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं। 2023-24 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 15 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, कृषि उत्पाद, और खनन के क्षेत्र में निवेश को लेकर दोनों देशों के उद्योग जगत में उत्साह देखा जा रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच “पीपल-टू-पीपल कनेक्ट” यानी जनता से जनता के रिश्ते को भी और गहरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के सुझाव रखे।
वहीं, वियतनामी विदेश मंत्री ले होई चुंग ने भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ पहलों की सराहना की और कहा कि वियतनाम भारतीय कंपनियों को निवेश के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को उभरते वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्रों में मिलकर काम करना चाहिए। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और वियतनाम दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच सामरिक तालमेल बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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