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गया। बिहार के गया जी में चल रहे पितृपक्ष मेले के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करने पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में पितृपक्ष के 13वें दिन अफ्रीकी देश घाना से आए माइकल और डेविड ने भी अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान किया। माइकल और डेविड ने गया जी के प्रमुख धार्मिक स्थलों देवघाट, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट में विधि-विधान के साथ पिंडदान किया। इस दौरान उन्होंने सनातन परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
गया जी को हिंदू धर्म में पितरों के पिंडदान और श्राद्ध के लिए प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान यहां भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। फल्गु नदी के तट और विष्णुपद मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में तीर्थयात्री धार्मिक अनुष्ठान करते दिखाई देते हैं।
देवघाट से अक्षयवट तक किया अनुष्ठान
घाना से पहुंचे दोनों तीर्थयात्रियों ने देवघाट पर धार्मिक प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट में भी अनुष्ठान संपन्न किए गए। स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने उन्हें पिंडदान की विधि पूरी कराई। माइकल और डेविड का गया जी पहुंचकर पिंडदान करना पितृपक्ष मेले में विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी का उदाहरण बन गया। दोनों ने भारतीय धार्मिक परंपरा के अनुसार अपने पूर्वजों के लिए श्रद्धा अर्पित की।
देश-विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालु
पितृपक्ष मेले के दौरान गया जी में हर दिन बड़ी संख्या में लोग पिंडदान के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की स्मृति में पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गया जी में किया गया पिंडदान पितरों की आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान प्रशासन की ओर से भी तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रमुख घाटों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
घाना से आए माइकल और डेविड की मौजूदगी ने पितृपक्ष मेले में लोगों का ध्यान खींचा। दोनों ने स्थानीय परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना की और अपने पूर्वजों को याद किया। गया जी में जारी पितृपक्ष मेले के आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में देश और विदेश के श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। फिलहाल विभिन्न वेदियों और घाटों पर पिंडदान का क्रम लगातार जारी है।
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