
नई दिल्ली। देशभर में सक्रिय हो चुका मानसून अब एक बार फिर अपना रुख बदलने जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून ट्रफ लाइन के उत्तर की ओर खिसकने से उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान भारी बारिश की संभावना जताई जा रही है।
मौसम के इस बदलाव का असर कई राज्यों पर देखने को मिल सकता है। जहां कुछ क्षेत्रों में लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर सकते हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी वर्षा के कारण बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
उत्तर और मध्य भारत में बारिश कम होने के संकेत
मौसम विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक, जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में मानसून काफी सक्रिय रहा था। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई थी।
अब मानसून ट्रफ के उत्तर दिशा की ओर खिसकने के कारण इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मानसून ट्रफ दोबारा दक्षिण दिशा की ओर नहीं लौटती, तब तक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में वर्षा कमजोर रह सकती है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ेगी बारिश
मानसून के बदले पैटर्न के चलते पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश बढ़ने के आसार हैं। इन क्षेत्रों में कई जगहों पर भारी वर्षा भी हो सकती है।
मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि लगातार बारिश वाले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की स्थिति बन सकती है।
पहाड़ी राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए खतरा बढ़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क बंद होने और नदी-नालों के जलस्तर बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
प्रशासन ने भी संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है। यात्रियों और स्थानीय लोगों को मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।
खरीफ फसलों पर पड़ सकता है असर
मानसून की स्थिति में बदलाव का सीधा असर खेती पर भी पड़ सकता है। उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में अगर बारिश कमजोर रहती है तो खरीफ फसलों की बुआई और शुरुआती विकास पर प्रभाव पड़ सकता है।
किसानों के लिए जुलाई का महीना काफी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुआई का काम तेजी से चलता है। पर्याप्त बारिश नहीं होने पर किसानों को सिंचाई के अतिरिक्त साधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
चार से पांच दिन बाद फिर बदल सकती है स्थिति
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून ट्रफ के दोबारा दक्षिण की ओर लौटने में चार से पांच दिन या उससे अधिक समय लग सकता है। इसके बाद उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ सकती हैं।
फिलहाल मौसम का यह बदला हुआ स्वरूप देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग असर डाल रहा है। कहीं बारिश की कमी चिंता बढ़ा रही है तो कहीं भारी बारिश से बाढ़ और आपदा का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर राज्यों के लिए अलर्ट जारी कर रहा है।





