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नवरात्रि में पुरुषों का साड़ी पहनकर गरबा, 200 साल पुरानी अनोखी परंपरा वायरल

jantaserishta.com
30 Sept 2025 11:30 AM IST
नवरात्रि में पुरुषों का साड़ी पहनकर गरबा, 200 साल पुरानी अनोखी परंपरा वायरल
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Ahmedabad. अहमदाबाद। नवरात्रि का त्योहार भक्ति, संस्कृति और रंगारंग परंपराओं का प्रतीक है। आम तौर पर गरबा नाइट में महिलाएं अपनी रंग-बिरंगी चनिया-चोली में नाचती हैं, लेकिन इस बार अहमदाबाद से एक अनोखी और आश्चर्यजनक परंपरा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पुरुष साड़ी पहनकर गरबा करते दिखाई दे रहे हैं। यह घटना अहमदाबाद के साडू माता नी पोल इलाके की है। यहां हर साल नवरात्रि की आठवीं रात को पुरुष इस अनूठी रस्म का पालन करते हैं, जिसे स्थानीय लोग ‘सादुमा ना गरबा’ के नाम से जानते हैं। यह केवल एक नृत्य नहीं है, बल्कि इसमें भक्ति, आस्था और एक 200 साल पुरानी कहानी का गहरा महत्व है।




स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा लगभग दो सदियों पुरानी है। कहा जाता है कि लगभग 200 साल पहले सादुबेन नाम की एक महिला ने बारोट समुदाय के पुरुषों से अपनी रक्षा करने की गुहार लगाई थी। उस समय एक मुगल सरदार उसे अपनी उपपत्नी बनाना चाहता था। लेकिन अफसोस, पुरुषों ने उसकी मदद नहीं की। सादुबेन ने इस घटना का विरोध करने और अपनी भक्ति और आस्था को दर्शाने के लिए पुरुषों को साड़ी पहनकर गरबा करने की परंपरा की शुरुआत की। यह केवल नृत्य नहीं, बल्कि उसके प्रायश्चित और आस्था का प्रतीक बन गया। इस रस्म में पुरुष पारंपरिक साड़ी और आभूषण पहनते हैं और गरबा के दौरान विशेष मंत्रोच्चारण और भक्ति गीतों के साथ नृत्य करते हैं। यह परंपरा अब 200 साल बाद भी बरकरार है और स्थानीय लोगों के लिए एक गर्व की बात मानी जाती है।

हाल ही में इस परंपरा को दिखाने वाला इंस्टाग्राम रील वायरल हो गया है। वीडियो में पुरुषों की रंग-बिरंगी साड़ी और गरबा का जोश देखने लायक है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया है। कई लोग इस परंपरा की अनोखी प्रकृति और सांस्कृतिक महत्व पर हैरानी और तारीफ कर रहे हैं। स्थानीय विद्वानों का कहना है कि सादुमा ना गरबा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है। इसमें पुरुषों की भक्ति, पश्चाताप और समाज में नैतिकता का संदेश छिपा हुआ है। यह परंपरा यह याद दिलाती है कि समाज में अन्याय के खिलाफ खड़े होने और आस्था बनाए रखने का महत्व हमेशा रहा है। पुराने दस्तावेजों और स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, यह परंपरा बारोट समुदाय के लिए विशेष महत्व रखती है।

पुरुष इस रस्म को निभाकर अपनी सांस्कृतिक जिम्मेदारी और आस्था का प्रदर्शन करते हैं। महिलाओं के नृत्य और पुरुषों की इस अनूठी परंपरा का संगम नवरात्रि के उत्सव को और भी यादगार बनाता है। वायरल वीडियो ने न केवल अहमदाबाद में बल्कि पूरे देश में लोगों का ध्यान खींचा है। कई युवा और सामाजिक मीडिया प्रभावित लोग इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं और लोग कमेंट कर इसकी तारीफ कर रहे हैं। इसे देख कर कई लोग अपने क्षेत्र की परंपराओं को भी याद कर रहे हैं और सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस परंपरा में शामिल होना किसी के लिए भी सम्मान और गर्व की बात है। पुरुषों की साड़ी पहनकर गरबा करने की रस्म केवल एक नृत्य नहीं है, बल्कि यह समाज में भक्ति, प्रायश्चित और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। साडू माता नी पोल इलाके के वरिष्ठ नागरिक और आयोजक बताते हैं कि इस परंपरा को हमेशा सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से निभाया गया है। आयोजकों ने कहा कि यह परंपरा न केवल हमारे समाज की सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और परंपराओं से जोड़ने का माध्यम भी है। इस प्रकार, अहमदाबाद में नवरात्रि के अवसर पर पुरुषों का साड़ी पहनकर गरबा करना केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि 200 साल पुरानी भक्ति और आस्था की मिसाल है। सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो देशभर में लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और अनोखी परंपराओं की याद दिला रहा है।
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