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बोलीं- ‘अतीत को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने का समय’
Anantnag. अनंतनाग। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और Mehbooba Mufti ने कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास के मुद्दे पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों को घाटी में वापस लाने और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय की भी बड़ी भूमिका होनी चाहिए। उनके अनुसार, सामाजिक सहभागिता और आपसी विश्वास के माध्यम से ही इस संवेदनशील मुद्दे का स्थायी समाधान संभव है।
अनंतनाग में मीडिया से बातचीत के दौरान महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीरी पंडित और कश्मीरी मुस्लिम सदियों से एक साझा संस्कृति और विरासत का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में दोनों समुदायों को आपसी विश्वास और भाईचारे को मजबूत करने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस दिशा में सरकार की तुलना में यहां के स्थानीय मुस्लिम लोगों की भागीदारी अधिक होनी चाहिए। अगर समाज आगे आएगा और अपने कश्मीरी पंडित भाइयों का स्वागत करेगा, तो उनके मन में सुरक्षा और अपनत्व की भावना और मजबूत होगी।”
#WATCH | अनंतनाग, जम्मू-कश्मीर: PDP प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कश्मीरी पंडितों की वापसी और उनके पुनर्वास के विषय कहा, "...मुझे लगता है कि इस ओर सरकार की कम और यहां के स्थानीय मुस्लिम लोगों की भागीदारी अधिक होनी चाहिए। मैं गुजारिश करूंगी कि हमारे… pic.twitter.com/vpVuCscadP
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 24, 2026
पीडीपी प्रमुख ने कश्मीरी पंडित समुदाय से भी भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि अतीत की दुखद घटनाओं को हमेशा याद रखने के बजाय भविष्य की ओर देखने की जरूरत है। उनके मुताबिक, शांति, मेल-मिलाप और विश्वास का माहौल बनाने के लिए दोनों पक्षों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। महबूबा मुफ्ती ने कहा, “मैं गुजारिश करूंगी कि हमारे कश्मीरी पंडित भाई पिछली बातों की ओर देखना छोड़ दें और आगे बढ़ें। हमें पिछली बातें भुलाकर आगे की ओर चलना चाहिए। अगर हम हमेशा पुराने जख्मों को याद करते रहेंगे तो नई शुरुआत करना मुश्किल हो जाएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि जो कश्मीरी पंडित वर्तमान में घाटी में रह रहे हैं, उनके लिए बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने रोजगार, आवास, शिक्षा और सुरक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही। पूर्व मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यदि सरकार और समाज मिलकर सकारात्मक प्रयास करेंगे तो आने वाले समय में अधिक संख्या में कश्मीरी पंडित घाटी लौटने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा कि कश्मीर की बहुलतावादी पहचान और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के लिए सभी समुदायों का साथ रहना आवश्यक है।
कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास लंबे समय से जम्मू-कश्मीर की राजनीति और सामाजिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय रहा है। विभिन्न सरकारें समय-समय पर उनकी वापसी और पुनर्वास के लिए योजनाएं बनाती रही हैं। हालांकि सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दे अब भी इस प्रक्रिया की बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। महबूबा मुफ्ती के इस बयान को घाटी में सामाजिक सौहार्द और सामुदायिक विश्वास बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाओं का भी इंतजार किया जा रहा है।
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