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'मेरी आत्मा पृथ्वी पर भटकती रहे' , सुसाइड नोट से खुलासा, उठीं 2 लाशें

jantaserishta.com
15 March 2024 8:43 AM IST
मेरी आत्मा पृथ्वी पर भटकती रहे , सुसाइड नोट से खुलासा, उठीं 2 लाशें
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'मेरी आत्मा पृथ्वी पर भटकती रहे' , सुसाइड नोट से खुलासा, उठीं 2 लाशें

पर्स और गिफ्ट आदि सामान का स्टोर चलाते हैं।
गाजियाबाद: गाजियाबाद के महेंद्रा एन्क्लेव में दंपति ने पेपर कटर से इकलौते बेटे की हत्या कर दी। इसके बाद पति ने पत्नी का गला काटा और फिर अपनी गर्दन भी रेत डाली। घटना में पत्नी और बेटे की मौत हो गई, जबकि कारोबारी की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस को मौके से सुसाइड नोट मिला, जिसमें कर्ज से परेशान होकर घटना को अंजाम देने की बात लिखी है। पुलिस के मुताबिक अमरदीप हिमाचल के कांगड़ा में पर्स और गिफ्ट आदि सामान का स्टोर चलाते हैं।
अमरदीप उर्फ अप्पू ने परिवार के खात्मे की योजना कुछ दिन पहले ही बना ली थी। 11 मार्च को डायरी में लिखा गया सुसाइड नोट इसका प्रमाण है। कारोबारी ने सुसाइड नोट में लिखा कि वह नहीं चाहता कि पत्नी और बेटा दर-दर की ठोकरें खाएं, इसलिए उन्हें साथ लिए जा रहा हूं। सुसाइड नोट में अमरदीप ने भगवान ने कामना की थी कि पत्नी और बेटे को मुक्ति दें और उसकी आत्मा पृथ्वी पर भटकती रहे। उसने ढाई पन्ने के सुसाइड नोट में लिखा कि वह पूरे होश में जीवन समाप्त करने जा रहा है। उसकी मौत के बाद पत्नी और बेटे का कोई सहारा नहीं है। वह दर-दर की ठोकरें न खाएं, इसलिए उन्हें साथ लेकर जा रहा हूं। इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। वह नहीं चाहता कि भविष्य में उसकी वजह से किसी को नुकसान हो। वह भाई-बहनों में सबसे बड़ा है, लेकिन आज तक बड़े होने का फर्ज नहीं निभा सका। मां-बाप को बर्बादी के सिवा कुछ नहीं दिया। उनके जाने के बाद अब भाई-बहनों को परेशान कर रहा हूं। कारोबारी ने लिखा कि उसके ऊपर इतना कर्जा हो चुका है कि उसे उतारने में पूरा जीवन कम पड़ जाएगा।
अमरदीप ने सुसाइड नोट में लिखा कि उसने मकान पर लोन के लिए आवेदन किया। लोन स्वीकृत हो गया और भाई-बहन से पूछे बिना दस्तावेज दे दिए। उम्मीद थी कि भाई-बहन मान जाएंगे, लेकिन उन्होंने मना कर दिया तो हिम्मत टूट गई। कारोबारी ने भाई को लिखा कि सिरोही जी से बात करके मकान के कागज वापस ले लेना।
अमरदीप ने सुसाइड नोट में लिखा कि आज तक उसने रायता ही फैलाया और भाई-बहन ने समेटा। भाई, आज आखिरी रायता फैला रहा हूं, इसे भी समेट लेना। मेरी नीयत कभी खराब नहीं थी। हमेशा सबके लिए अच्छा करना चाहा। पैदा होने के बाद जो भी मुझसे जुड़ा, उसे दुख के सिवा कुछ नहीं दिया। आज आखिरी बार माफी मांगता हूं। हो सके तो माफ कर देना। अमरदीप ने आखिर में अंतिम प्रणाम करते हुए छोटे भाई-बहनों को प्यार और बच्चों को स्नेह लिखा।
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