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नेहरू पर मौलाना साजिद रशीदी का बड़ा आरोप

SHIDDHANT
24 Oct 2026 9:55 PM IST
नेहरू पर मौलाना साजिद रशीदी का बड़ा आरोप
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मौलाना साजिद रशीदी ने नेहरू पर उठाए सवाल
दिल्ली। भारत के विभाजन को लेकर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी के बयान से राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस तेज हो सकती है। रशीदी ने दावा किया कि यदि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू चाहते, तो भारत का विभाजन नहीं होता। उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर भी विवादित टिप्पणी की और आरोप लगाया कि नेहरू ने ही जिन्ना को तैयार किया था। हालांकि, ये रशीदी के अपने दावे हैं, जिनकी पुष्टि के लिए ऐतिहासिक साक्ष्यों और उस दौर की घटनाओं को अलग-अलग देखना जरूरी है।
नेहरू और जिन्ना को लेकर क्या बोले मौलाना?
मौलाना साजिद रशीदी ने भारत के बंटवारे का जिक्र करते हुए कहा कि देश का विभाजन टाला जा सकता था। उनके मुताबिक, तत्कालीन नेतृत्व की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण थी। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधते हुए दावा किया कि जिन्ना को एक अलग राजनीतिक पहचान देने में उनकी भूमिका थी।
रशीदी ने कहा, "जिस तरह आज एक और जिन्ना तैयार किया जा रहा है, उसी तरह उस समय भी जिन्ना को तैयार किया गया था। उनसे कहा गया था कि यहां एक गांधी हैं, तुम पाकिस्तान के गांधी बन जाओगे।"
उनकी इस टिप्पणी में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों की तुलना देश के विभाजन से जुड़े घटनाक्रम के साथ की गई है। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में जिन ऐतिहासिक घटनाओं या दस्तावेजों का हवाला दिया, उनकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
क्यों हुआ था भारत का विभाजन?
भारत का विभाजन 1947 में ब्रिटिश शासन के अंत के समय हुआ था। इसके पीछे कई राजनीतिक, सांप्रदायिक और संवैधानिक कारण थे। मुस्लिम लीग की अलग पाकिस्तान की मांग, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच राजनीतिक मतभेद, सत्ता हस्तांतरण को लेकर असहमति और ब्रिटिश सरकार की नीतियों ने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया।
मोहम्मद अली जिन्ना मुस्लिम लीग के प्रमुख नेता थे और उन्होंने पाकिस्तान की मांग का नेतृत्व किया। वहीं, जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। महात्मा गांधी ने विभाजन रोकने और सांप्रदायिक हिंसा को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किए थे, लेकिन अंततः भारत का बंटवारा हुआ।
इतिहासकार विभाजन को किसी एक व्यक्ति के फैसले का परिणाम मानने के बजाय कई वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रम और विभिन्न पक्षों के निर्णयों से जोड़कर देखते हैं।
बयान से उठे कई सवाल
मौलाना साजिद रशीदी के बयान में नेहरू की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऐसे दावों का मूल्यांकन करते समय उस दौर के दस्तावेजों, राजनीतिक वार्ताओं और ऐतिहासिक तथ्यों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
फिलहाल, रशीदी की टिप्पणी ने भारत के विभाजन और उसके लिए जिम्मेदार परिस्थितियों पर बहस का विषय सामने रखा है। उनके बयान पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की स्थिति में यह मुद्दा और चर्चा में आ सकता है।
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