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AMERICA अमेरिका: उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मरीनेरा’ को जब्त कर लिया है, जिससे अमेरिका-रूस के बीच टकराव की वैश्विक चिंता बढ़ गई है। इस कार्रवाई में अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सेना ने संयुक्त ऑपरेशन किया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि टैंकर प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए वेनेजुएला का तेल ले जा रहा था। ‘मरीनेरा’ का पुराना नाम ‘बेला-1’ था और 2024 में इस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद इसका नाम बदलकर मरीनेरा कर दिया गया।
टैंकर पर कब्जे का दृश्य फिल्मी लग रहा था, जिसमें हेलीकॉप्टर मंडराते और अमेरिकी जवान रस्सियों के सहारे उतरते दिखे। खास बात यह रही कि ऑपरेशन के समय आसपास रूसी नौसेना के युद्धपोत और पनडुब्बियां मौजूद थीं, लेकिन जब अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने टैंकर पर कब्जा किया, उस समय कोई रूसी जहाज पास नहीं था। ब्रिटेन ने इस ऑपरेशन में अमेरिका का पूरा समर्थन किया। रूस ने इस कार्रवाई की तीखी निंदा की। रूसी सीनेटर एंड्री क्लिशस ने इसे खुले समुद्र में समुद्री डकैती करार दिया और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। रूस ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का हवाला देते हुए कहा कि किसी देश को दूसरे देश के विधिवत पंजीकृत जहाज के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि रूस इसका जवाब कैसे देता है।
अमेरिका ने 24 घंटे के भीतर कैरिबियन सागर में ‘एम/टी सोफिया’ नामक एक और तेल टैंकर को जब्त किया, जो वेनेजुएला से चीन जा रहा था। इससे स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन तेल के कारोबार और नियंत्रण को लेकर आक्रामक नीति अपना रहा है। ट्रंप की विदेश नीति केवल रूस तक सीमित नहीं है। वेनेजुएला और चीन के हितों पर सीधा असर डालते हुए अमेरिकी कदम उठाए गए हैं। ईरान को लेकर ट्रंप के करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने खुली धमकी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों की हत्या नहीं रुकी तो सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने का आदेश दिया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन का ध्यान ग्रीनलैंड पर भी है। यूरोपीय देशों और नाटो को चेतावनी दी गई कि अमेरिका के बिना नाटो का कोई अस्तित्व नहीं है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों की आलोचना पर ट्रंप ने उन्हें सार्वजनिक मंच पर मजाक उड़ाकर राजनयिक मर्यादाओं को चुनौती दी।
इसके साथ ही अमेरिका अपने रक्षा बजट को 1 ट्रिलियन डॉलर से बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने की तैयारी में है, जिसे विशेषज्ञ युद्ध की तैयारी के रूप में देख रहे हैं। भारत के लिए भी चुनौतियां बढ़ सकती हैं, क्योंकि अमेरिका विचार कर रहा है कि यदि भारत रूस से तेल खरीदता रहा तो उस पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इस तरह ट्रंप प्रशासन की आक्रामक विदेश नीति और तेल कारोबार पर नियंत्रण की कार्रवाई ने वैश्विक तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिका-रूस टकराव, मिडिल ईस्ट की घटनाएं और चीन-ईरान पर दबाव ने दुनिया को नई अनिश्चितताओं के दौर में डाल दिया है।
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