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राम मंदिर चढ़ावा चोरी का बड़ा खुलासा: 2 हजार से शुरू हुई चोरी, रोजाना 3 लाख तक पार करने लगे आरोपी

Shantanu Roy
12 July 2026 12:27 AM IST
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का बड़ा खुलासा: 2 हजार से शुरू हुई चोरी, रोजाना 3 लाख तक पार करने लगे आरोपी
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बड़ी खबर
Ayodhya. अयोध्या। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों से पुलिस पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं। पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान आरोपियों ने बताया कि शुरुआत में मामूली रकम चुराई जाती थी, लेकिन समय के साथ लालच इतना बढ़ गया कि रोजाना लाखों रुपये तक चोरी होने लगी। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने पूरे घटनाक्रम, चोरी के तरीके और इसमें शामिल लोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों करुणेश पांडेय, लवकुश तिवारी और अनुकल्प मिश्र से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

2 हजार रुपये से हुई थी चोरी की शुरुआत
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि चढ़ावे की चोरी की शुरुआत सबसे पहले अविनाश शुक्ला ने की थी। शुरुआत में वह केवल दो-दो हजार रुपये निकालता था। उसे ऐसा करते देखकर करुणेश पांडेय भी इस काम में शामिल हो गया। कुछ समय बाद अनुकल्प मिश्र और अन्य लोग भी इस गिरोह का हिस्सा बन गए। इसके बाद सभी ने मिलकर संगठित तरीके से चढ़ावे की रकम में हाथ साफ करना शुरू कर दिया। आरोपियों के मुताबिक शुरुआत में उन्हें पकड़े जाने का डर रहता था, इसलिए कम रकम चोरी की जाती थी। लेकिन लगातार कई दिनों तक किसी को शक नहीं हुआ, जिससे उनका हौसला बढ़ता गया।

लाखों रुपये तक पहुंच गई चोरी
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि पहले 10 से 15 हजार रुपये प्रतिदिन चोरी किए जाते थे। बाद में लालच बढ़ने पर यह रकम एक लाख रुपये तक पहुंच गई। आरोपियों ने बताया कि कई बार एक व्यक्ति अकेले ही रोजाना तीन लाख रुपये तक निकाल लेता था। धीरे-धीरे यह उनके बीच एक तरह की प्रतिस्पर्धा बन गई थी कि कौन अधिक रकम चुरा सकता है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने माना कि लालच में उन्हें यह एहसास ही नहीं रहा कि वे भगवान के चढ़ावे की रकम चुरा रहे हैं।

ऐसे देते थे चोरी को अंजाम
पुलिस पूछताछ में चोरी का तरीका भी सामने आया है। आरोपियों ने बताया कि चढ़ावे की गिनती के दौरान कर्मचारियों की कोई व्यक्तिगत तलाशी नहीं होती थी, जिसका वे फायदा उठाते थे। वे चोरी की रकम पहले मंदिर परिसर में बाथरूम की सीवर लाइन के लिए खोदे गए गड्ढे में छिपा देते थे। वहां एक रैक और उसके ऊपर कवर लगा था, जिससे किसी को शक नहीं होता था। बाद में मौका मिलने पर वे उस रकम को अपनी जेबों और जुराबों में छिपाकर मंदिर परिसर से बाहर ले जाते थे। आरोपियों ने बताया कि वे जानबूझकर शर्ट को पैंट के अंदर नहीं करते थे, ताकि जेब में रखी नोटों की गड्डियां दिखाई न दें।

पूछताछ में भावुक हुए आरोपी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रिमांड के दौरान आरोपी मानसिक दबाव में दिखाई दिए। अधिकारियों का कहना है कि वे कई बार रोने लगते थे और ठीक से सो भी नहीं पा रहे थे। हालांकि, पुलिस का यह भी कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी बिना ज्यादा हिचकिचाहट के दी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि चोरी करते समय उन्हें कभी यह महसूस नहीं हुआ कि यह भगवान को चढ़ाई गई श्रद्धालुओं की आस्था की राशि है।

जेल में मिले अलग-अलग सुझाव
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि जेल पहुंचने के बाद वहां बंद अन्य कैदियों ने उन्हें हिम्मत बंधाई। उनके अनुसार कुछ कैदियों ने कहा कि गंभीर अपराधों के आरोपी भी कानूनी प्रक्रिया के बाद बाहर आ जाते हैं, इसलिए चोरी के मामले में भी उन्हें राहत मिल सकती है। हालांकि, समय बीतने के साथ जब पूरे मामले की चर्चा उनके गांव और मोहल्लों तक पहुंची तो उन्हें अपनी गलती का एहसास होने लगा। आरोपियों ने बताया कि इस घटना के बाद उनके परिवारों से भी कई लोगों ने दूरी बना ली।

पुलिस जांच जारी
पुलिस इस मामले में पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि चोरी कब से चल रही थी, कुल कितनी रकम गायब हुई और इसमें कितने लोग शामिल थे। साथ ही आरोपियों के आर्थिक लेन-देन और अन्य संभावित सहयोगियों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
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