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राहुल गांधी को मिली बड़ी राहत, FIR आदेश पर लगी रोक

Shantanu Roy
18 April 2026 6:01 PM IST
राहुल गांधी को मिली बड़ी राहत, FIR आदेश पर लगी रोक
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Allahabad. इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कथित दोहरी नागरिकता मामले में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से जुड़े अपने पहले दिए गए आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश ओपन कोर्ट में सुनाया गया था, जिसे अब फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की गई है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान याची, केंद्र सरकार और राज्य सरकार के अधिवक्ताओं से अदालत ने यह पूछा था कि क्या इस मामले में विपक्षी संख्या एक यानी राहुल गांधी को नोटिस जारी किया जाना आवश्यक है। इस पर अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं है। इसके बाद अदालत ने ओपन कोर्ट में एफआईआर दर्ज करने का विस्तृत आदेश पारित कर दिया था।
हालांकि, बाद में जब यह आदेश टाइप होने और हस्ताक्षरित होने से पहले न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने विधिक स्थिति की पुनः समीक्षा की, तो पाया गया कि वर्ष 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ द्वारा दिए गए निर्णय में स्पष्ट किया गया है कि यदि एफआईआर दर्ज करने से संबंधित प्रार्थना पत्र खारिज होता है, तो उसके विरुद्ध पुनरीक्षण याचिका ही पोषणीय होगी। साथ ही ऐसे मामलों में प्रस्तावित अभियुक्त को नोटिस जारी किया जाना अनिवार्य है। इस विधिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने माना कि बिना राहुल गांधी को नोटिस दिए मामले का निपटारा करना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर पहले दिए गए आदेश पर रोक लगा दी गई और आगे की सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित कर दी गई।
गौरतलब है कि यह मामला कर्नाटक निवासी याची एस. विग्नेश शिशिर की याचिका से जुड़ा है। याचिका में राहुल गांधी पर कथित दोहरी नागरिकता को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम तथा पासपोर्ट अधिनियम के तहत कार्रवाई और विस्तृत जांच की मांग की गई है। याची की ओर से पहले निचली अदालत में भी यह प्रार्थना पत्र दायर किया गया था, जिसे खारिज कर दिया गया था।
इसके बाद मामला हाईकोर्ट में पहुंचा। शुक्रवार को अदालत ने प्रारंभिक रूप से एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था, जिससे राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल बढ़ गई थी। लेकिन अब हाईकोर्ट द्वारा आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद मामला फिर से कानूनी प्रक्रिया के दायरे में लौट आया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सभी पक्षों को सुनने और नोटिस जारी करने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है, हालांकि फिलहाल यह मामला न्यायालय की प्रक्रिया में विचाराधीन है।
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