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Lucknow लखनऊ। उत्तर प्रदेश की जौनपुर पुलिस ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया। मामले की जांच में आरोपी के द्वारा बजाज लोन, इन्वेस्टमेंट और टूर पैकेज के नाम पर लोगों से 2.5 करोड़ की ठगी करने का खुलासा हुआ है। साइबर क्राइम सेल ने गैंग के लीडर को गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान शुभम सिंह के रूप में हुई है। इसने देशभर के हजारों लोगों को ठगी का शिकार बनाया था और इसके खिलाफ महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के अलग-अलग पुलिस थानों में 20 से ज्यादा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हैं।
पुलिस ने आरोपी के पास से 6 मोबाइल फोन, 15 एटीएम कार्ड, 9 पासबुक और 7 चेकबुक बरामद किए हैं। जांच में पता चला कि अपराधी फर्जी आधार कार्ड और फर्जी सिम कार्ड के जरिए साइबर फ्रॉड का खेल चला रहा था। इसी के साथ, जौनपुर पुलिस की टेक्निकल जांच और सर्विलांस में आरोपी द्वारा करोड़ों की ठगी करने की कई परतें सामने आई हैं। जांच में आरोपी के पास से साइबर ठगी के 1.45 लाख रुपए नकद और कई बैंक खातों का खुलासा हुआ है। वहीं, साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को लेकर जौनपुर के एसएसपी के निर्देशन में साइबर अपराधियों के खिलाफ एक लगातार कार्रवाई की जा रही है।
बता दें कि साइबर ठगी का इसी प्रकार का मामला शनिवार को लखनऊ से सामने आया, जहां साइबर क्राइम सेल और साइबर थाना लखनऊ की संयुक्त पुलिस टीम ने देशभर के नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों से ऑनलाइन नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच जालसाजों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे 11 की-पैड मोबाइल फोन, 2 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 102 वर्क डाटा शीट तथा 26 फर्जी जॉइनिंग लेटर, अप्रूवल लेटर और रजिस्ट्रेशन लेटर समेत अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।
इस मामले को लेकर एडीसीपी किरण यादव ने बताया कि साइबर क्राइम सेल और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने विभूतिखंड थाना क्षेत्र स्थित जेएस टॉवर की चौथी मंजिल पर संचालित एक अवैध कॉल सेंटर पर छापेमारी कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि आरोपी कई वेबसाइटों से नौकरी तलाश रहे युवाओं का डाटा खरीदते थे। इसके बाद कॉल सेंटर में कार्यरत कर्मचारी अभ्यर्थियों को फोन कर अमूल, अमेजन, इन्फोसिस, फ्लिपकार्ट, मैनकाइंड, सुजुकी, पार्ले और सिप्ला जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में आकर्षक वेतन पर नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। विश्वास जीतने के लिए आरोपियों द्वारा फर्जी जॉइनिंग लेटर, अप्रूवल लेटर और रजिस्ट्रेशन दस्तावेज व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जाते थे।
उन्होंने बताया कि इसके बाद अभ्यर्थियों से रजिस्ट्रेशन फीस, इंटरव्यू चार्ज, गेट पास शुल्क और अन्य प्रक्रियात्मक खर्चों के नाम पर रकम वसूली जाती थी। ठगी की यह धनराशि फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का कथित मैनेजर जीशान खान, टीम लीडर सतीश पाल तथा कॉलर के रूप में कार्यरत सोनाली चौरसिया, शिवानी वर्मा और नीलू वर्मा शामिल हैं।
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