
नई दिल्ली। भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। लंबे समय तक गन्ने पर निर्भर रहने वाला इथेनॉल उत्पादन अब मक्का और अन्य अनाजों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। जून 2026 तक तेल विपणन कंपनियों को रिकॉर्ड 717 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति की जा चुकी है, जिसमें अनाज आधारित इथेनॉल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही है।
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इस अभियान में अब तक गन्ना प्रमुख स्रोत रहा था, लेकिन बदलते हालात में सरकार और उद्योग ने अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है।
आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 तक कुल इथेनॉल आपूर्ति में 67 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों से आया है, जबकि गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत रही। खास बात यह है कि अकेले मक्का से 258 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन हुआ, जो कुल आपूर्ति में सबसे बड़ा योगदान है।
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, तेल कंपनियों ने कुल 1,048 करोड़ लीटर इथेनॉल आपूर्ति के लिए करार किए हैं। इसमें से जून तक 717 करोड़ लीटर की आपूर्ति पूरी हो चुकी है, जो तय लक्ष्य का करीब 68 प्रतिशत है। इसमें 480 करोड़ लीटर इथेनॉल अनाज आधारित स्रोतों से और 238 करोड़ लीटर गन्ना आधारित स्रोतों से मिला है।
मक्का आधारित इथेनॉल मॉडल को किसानों के लिए भी फायदेमंद माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, मक्का की खेती करने वाले किसानों को बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं और उन्हें अपनी फसल के लिए अतिरिक्त मांग मिल सकती है। इससे कृषि क्षेत्र और ऊर्जा क्षेत्र के बीच एक नया संबंध विकसित हो रहा है।
भारत सरकार लंबे समय से पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर खर्च कम करना, प्रदूषण घटाना और देश में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना है। इथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।
पहले इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों पर ज्यादा निर्भरता थी। हालांकि, गन्ने की उपलब्धता, पानी की जरूरत और उत्पादन लागत जैसे कारणों को देखते हुए अब मक्का, चावल और अन्य अनाजों से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मक्का आधारित इथेनॉल उत्पादन में बढ़ोतरी से देश के कई राज्यों में किसानों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा और किसान पारंपरिक फसलों के अलावा ऊर्जा उत्पादन से जुड़ी फसलों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की बढ़ती सफलता भारत की ऊर्जा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। रिकॉर्ड आपूर्ति और अनाज आधारित उत्पादन में बढ़ोतरी से साफ है कि देश अब ईंधन के लिए नए विकल्पों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
आने वाले समय में मक्का और अन्य अनाजों की भूमिका इथेनॉल उत्पादन में और बढ़ने की संभावना है। इससे भारत को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सकती है।





