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MUMBAI मुंबई: महाराष्ट्र की वित्तीय स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य ने कभी भी कर्ज भुगतान में डिफॉल्ट नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से राज्य को निर्धारित उधारी सीमा के भीतर ही कर्ज लिया जाता है और सरकार पूरी सीमा तक उधारी नहीं करती।
फडणवीस ने अपने बयान में उदाहरण देते हुए कहा कि यदि RBI किसी वर्ष महाराष्ट्र को ₹1.40 लाख करोड़ तक कर्ज लेने की सीमा देता है, तो राज्य सरकार लगभग ₹1 लाख करोड़ तक ही कर्ज लेती है। उनके मुताबिक, इस तरह सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति को नियंत्रण में बनाए रखने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र की उधारी राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) और निर्धारित वित्तीय मानकों के अनुरूप रहती है। महाराष्ट्र सरकार के आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 के बजट अनुमान में राज्य का कर्ज GSDP का करीब 18.3 प्रतिशत और राजकोषीय घाटा 2.7 प्रतिशत अनुमानित था।
वहीं, 2026-27 के बजट विश्लेषण के अनुसार महाराष्ट्र का राजकोषीय घाटा GSDP का 2.8 प्रतिशत रहने का लक्ष्य रखा गया है। बजट में कुल राजकोषीय घाटा करीब ₹1.50 लाख करोड़ अनुमानित है। फडणवीस के बयान में राज्य की उधारी और वित्तीय अनुशासन पर सरकार का पक्ष सामने आया है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध उधारी सीमा और वास्तविक कर्ज लेने के बीच अंतर बनाए रखने से वित्तीय प्रबंधन को नियंत्रित रखने में मदद मिली है।
महाराष्ट्र की वित्तीय स्थिति पर राजनीतिक बहस के बीच सरकार के आधिकारिक आंकड़े भी सामने हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य का राजकोषीय घाटा ₹1,24,209 करोड़ दर्ज हुआ था, जो GSDP का 2.74 प्रतिशत था। इस तरह मुख्यमंत्री फडणवीस ने महाराष्ट्र की उधारी नीति को लेकर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य RBI द्वारा निर्धारित सीमा के मुकाबले कम कर्ज लेने की नीति पर काम करता है।
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