
मुंबई: महाराष्ट्र कैबिनेट ने मंगलवार को एक पॉलिसी को मंज़ूरी दी, जिसके तहत ग्रुप-C यूनिफॉर्म वाली सेवाओं में सरकारी नौकरियों में पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत हॉरिजॉन्टल रिज़र्वेशन (क्षैतिज आरक्षण) दिया जाएगा। यह पॉलिसी उन अग्निवीरों पर लागू होगी जो सशस्त्र बलों में चार साल की सेवा पूरी करने के बाद राज्य सरकार में नौकरी करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पूर्व अग्निवीरों को नई भर्ती परीक्षाओं और ट्रेनिंग से छूट दी जाएगी, क्योंकि पहला बैच अपना कार्यकाल पूरा करके सशस्त्र बलों से वापस आ रहा है।
केंद्र सरकार ने 2022 में सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए अग्निपथ मिलिट्री भर्ती योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत, 17.5 से 21 साल की उम्र के उम्मीदवारों को चार साल के कार्यकाल के लिए भर्ती किया जाता है। अग्निवीर अनुशासन, नेतृत्व, तकनीकी कौशल, आपदा प्रबंधन, सुरक्षा और संगठनात्मक प्रक्रियाओं में ट्रेनिंग लेते हैं। चार साल के अंत में, परफॉर्मेंस, अनुशासन और कौशल के आधार पर 25 प्रतिशत को सशस्त्र बलों में स्थायी रूप से बनाए रखा जाता है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को सेवा से मुक्त कर दिया जाता है।
महाराष्ट्र सरकार ने गृह, राज्य उत्पाद शुल्क, वन और शहरी विकास विभागों के तहत विभिन्न संस्थानों में ग्रुप-C यूनिफॉर्म वाले पदों पर पूर्व अग्निवीरों की नियुक्ति के लिए पॉलिसी बनाने के मकसद से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई थी। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर पॉलिसी को अंतिम रूप दिया गया और बाद में मंगलवार को कैबिनेट ने इसे मंज़ूरी दे दी।
पॉलिसी के तहत, महाराष्ट्र के रहने वाले पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत हॉरिजॉन्टल रिज़र्वेशन दिया जाएगा। यह रिज़र्वेशन कम्पार्टमेंटल हॉरिजॉन्टल रिज़र्वेशन के तौर पर लागू किया जाएगा।
एक अधिकारी ने कहा, "अगर कुछ पदों के लिए 10 प्रतिशत से ज़्यादा हॉरिजॉन्टल रिज़र्वेशन की ज़रूरत पड़ती है, तो हाई-लेवल कमेटी को कोटा बढ़ाने का अधिकार दिया गया है, बशर्ते मौजूदा सोशल रिज़र्वेशन (सामाजिक आरक्षण) पर कोई असर न पड़े।" अधिकारियों के अनुसार, 2022 में 3,328 अग्निवीरों की भर्ती की गई थी — इनमें से 2,839 सेना से, 471 नौसेना से और 18 वायु सेना से थे। इनमें से 2,469 अग्निवीरों को अग्निपथ योजना के तहत अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद 2026 में सेवा से मुक्त किया जाएगा।
गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि नौसेना के 18 अग्निवीरों को तटीय पुलिस में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा, "ये अग्निवीर नावों पर खलासी (नाविक) के तौर पर काम करेंगे।"
आरक्षण के दायरे में आने वाले ग्रुप-C यूनिफॉर्म वाले पदों में पुलिस महानिदेशक और उनके अधीन आने वाले संस्थानों (जैसे महाराष्ट्र पुलिस और राज्य रिजर्व पुलिस बल) में पुलिस कॉन्स्टेबल और पुलिस कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) के पद; महाराष्ट्र जेल और सुधार सेवाओं में जेल कॉन्स्टेबल के पद; और नागरिक सुरक्षा निदेशालय के तहत फायरमैन, रेस्क्यूअर और उससे जुड़े पद शामिल होंगे।
इस नीति में कई अन्य पद भी शामिल होंगे, जैसे होम गार्ड्स के तहत हवलदार इंस्ट्रक्टर, जूनियर इंस्ट्रक्टर, मैकेनिकल इंस्ट्रक्टर, इंस्ट्रक्टर और प्रमोटर; राज्य खुफिया विभाग में पुलिस कॉन्स्टेबल सेलर (इंजन साइड) और पुलिस कॉन्स्टेबल सेलर (डेक साइड); राज्य आबकारी विभाग में जवान और जवान-सह-वाहन चालक के पद; वन विभाग में वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) के पद; और शहरी विकास विभाग व नगर निगमों के तहत फायरमैन और रेस्क्यूअर के पद।
एक अधिकारी ने कहा, "पूर्व अग्निवीरों को इन पदों के लिए लिखित परीक्षा से पूरी तरह छूट दी जाएगी। कैबिनेट ने उम्र में छूट, फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) और फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) से छूट, साथ ही वरिष्ठता, प्रमोशन, ट्रेनिंग और अन्य अनुभव व कौशल की मान्यता से जुड़े प्रावधानों को भी मंजूरी दी है। इन मामलों पर सरकार की ओर से एक विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा।" कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए श्री फडणवीस ने कहा, "महाराष्ट्र ने फ़ैसला किया है कि अग्निवीरों को राज्य सरकार के बलों में पुलिस और इसी तरह के पदों पर जगह दी जाएगी। उनके लिए कोई परीक्षा नहीं होगी। जो लोग महाराष्ट्र लौटना चाहते हैं और सरकार के लिए काम करना चाहते हैं, उन्हें सरकारी सेवा में शामिल किया जाएगा।"
उन्होंने कहा कि अग्निवीरों को उम्र सीमा में चार साल की छूट भी दी जाएगी।





