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Bhopal भोपाल। मध्य प्रदेश की पहचान देश के टाइगर स्टेट के तौर पर है। यहां सबसे ज्यादा बाघ हैं। बीते साल राज्य में कुल 55 बाघों की मौत हुई है, जिनमें से 38 की मौत प्राकृतिक है और राज्य में लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है। आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच देश में बाघों की संख्या में 24.10 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मध्यप्रदेश में यह वृद्धि 49.24 प्रतिशत रही। वार्षिक आधार पर देश में बाघों की औसत वृद्धि लगभग 6.02 प्रतिशत रही। मध्यप्रदेश में यह दर 12.31 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी अधिक हैं। इससे साबित होता है कि प्रदेश की संरक्षण रणनीतियां प्रभावी रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ संरक्षण रणनीतियों में केवल संख्या बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि मृत्यु दर का विश्लेषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2025 तक देश में बाघ मृत्यु दर औसतन 5 प्रतिशत से कम रही, जबकि मध्यप्रदेश में यह दर लगभग 6 से 7 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में बाघों की अधिक संख्या और बेहतर निगरानी प्रणाली के कारण मृत्यु की घटनाएं अधिक सटीकता से दर्ज होती हैं। इसे संरक्षण में विफलता नहीं, बल्कि बेहतर डिटेक्शन रेट के रूप में देखा जाना चाहिए। बताया गया है कि वर्ष 2025 में मध्य प्रदेश में दर्ज 55 बाघ मृत्यु घटनाओं का विस्तृत अध्ययन किया गया। इनमें प्राकृतिक कारणों से 38 बाघों की मृत्यु हुई, जो कुल मौतों का 69 प्रतिशत है।
इनमें आपसी संघर्ष, बीमारी, वृद्धावस्था, दुर्घटनाएं, और रेल और सड़क हादसे शामिल हैं। शिकार से 11 बाघों की मृत्यु हुई है, जो कुल मृत्यु संख्या का 20 प्रतिशत है। इनमें से अधिकांश मामलों में विद्युत करंट के उपयोग की पुष्टि हुई। उल्लेखनीय है कि इन प्रकरणों में अवैध शिकार की मंशा सिद्ध नहीं हुई, बल्कि फसलों और पशुधन की रक्षा का प्रयास प्रमुख कारण रहा है। व्याघ्र अंगों की तस्करी के लिए 6 बाघों का शिकार हुआ, जो कुल मौतों का 11 प्रतिशत है।
इन मामलों में बाघ के अवयव जब्त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इससे वन अमले की सक्रियता और सजगता सिद्ध हुई है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 में कराई गई बाघ गणना के अनुसार देश में कुल 3,682 बाघ पाए गए हैं, जिनमें से 785 बाघ मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए। यह संख्या देश में सर्वाधिक है। इसी के आधार पर मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा प्राप्त हुआ है। वर्तमान में प्रदेश में 11 राष्ट्रीय उद्यान, 26 वन्यप्राणी अभयारण्य और 09 टाइगर रिजर्व हैं। इन संरक्षित क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धति से निगरानी, आवास प्रबंधन, शिकार की रोकथाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
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