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लोकसभा-राज्यसभा 13 अगस्त से स्थगित, लेकिन अब तक जारी नहीं हुई सत्रावसान की अधिसूचना
jantaserishta.com
7 Oct 2026 3:38 PM IST

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नई दिल्ली: लोकसभा और राज्यसभा को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था। सामान्य तौर पर इसके बाद सत्रावसान की प्रक्रिया पूरी की जाती है, लेकिन इस बार मंगलवार तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं हुई।
स्रोत के मुताबिक, दोनों सदनों के एक साथ इतने लंबे समय तक बिना सत्रावसान रहने का यह सबसे लंबा दौर है। इससे पहले 1989 में दोनों सदन 53 दिन तक ऐसी स्थिति में रहे थे। उस समय 18 अगस्त को दोनों सदनों की बैठक स्थगित हुई थी और सत्रावसान किए बिना 11 अक्टूबर को उसी सत्र की बैठक फिर शुरू कर दी गई थी। इस बार 54 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन अभी तक न तो सदनों की बैठक दोबारा बुलाई गई है और न ही सत्रावसान किया गया है।
दोबारा बैठक बुलाने का विकल्प खुला
सत्रावसान नहीं होने के कारण सरकार के पास इसी सत्र की बैठक को दोबारा बुलाने का विकल्प मौजूद है। सत्तारूढ़ खेमे से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि आने वाले दिनों में संसद की बैठक बुलाने की संभावनाओं को लेकर चर्चा चल रही है।
राजनीतिक हलकों में परिसीमन, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े अगले कदमों को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक संसद की बैठक बुलाने या उसके एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
अध्यादेश जारी करने का रास्ता फिलहाल बंद
संसद का सत्रावसान नहीं होने का एक संवैधानिक प्रभाव अध्यादेश को लेकर भी है। स्रोत में राजनीतिक विश्लेषक संजय कुमार के हवाले से बताया गया है कि जब तक दोनों सदन सत्र में नहीं होते, तभी अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी किया जा सकता है। ऐसे में मौजूदा स्थिति में सत्रावसान नहीं होने के कारण अध्यादेश जारी करने का रास्ता खुला नहीं है। वहीं, इसी सत्र की बैठक दोबारा बुलाने का विकल्प बना हुआ है।
लोकसभा में 114 घंटे के मुकाबले सिर्फ 17 घंटे 30 मिनट काम
2026 के मानसून सत्र में लोकसभा की कुल 19 बैठकें हुईं। सामान्य तौर पर एक बैठक सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक होती है और दोपहर 1 से 2 बजे तक लंच ब्रेक रहता है। इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 6 घंटे कार्यवाही के लिए उपलब्ध होते हैं।
19 बैठकों के आधार पर करीब 114 घंटे काम होना था, लेकिन लोकसभा में लगभग 17 घंटे 30 मिनट ही कार्यवाही चली। यानी करीब 96 घंटे 30 मिनट का समय कामकाज के लिए इस्तेमाल नहीं हो सका।
इसके मुकाबले 2025 का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चला था। इसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों की 21-21 बैठकें हुई थीं। लोकसभा में उस दौरान करीब 37 घंटे काम हुआ था।
राज्यसभा में भी बड़ी अवधि तक नहीं चली कार्यवाही
राज्यसभा की भी मानसून सत्र में 19 बैठकें हुईं। यहां भी करीब 114 घंटे की कार्यवाही होनी थी, लेकिन लगभग 37 घंटे 24 मिनट ही काम हुआ।
इस तरह राज्यसभा में करीब 76 घंटे 36 मिनट का कार्य समय इस्तेमाल नहीं हो सका। यानी दोनों सदनों में मानसून सत्र के दौरान अपेक्षित समय की तुलना में काफी कम कार्यवाही हुई।
12 बिल पेश हुए, 11 दोनों सदनों से पास
2026 के मानसून सत्र में कुल 12 नए बिल पेश किए गए। इनमें 10 बिल लोकसभा और 2 बिल राज्यसभा में पेश हुए। लोकसभा में पेश किए गए विधेयक टैक्स, बैंकिंग, खनन, ट्रिब्यूनल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, परीक्षा में नकल रोकने, केरल का नाम बदलने और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या से जुड़े विषयों पर थे।
माइंस एंड मिनरल्स संशोधन बिल के राज्यसभा से पास होने के बाद 12 में से 11 बिल दोनों सदनों से पारित हो चुके हैं। केवल भारतीय सांख्यिकी संस्थान बिल ऐसा है, जो अभी दोनों सदनों से पारित नहीं हुआ है।
राज्यसभा में पेश किए गए दोनों बिल भी लोकसभा से पास हो चुके हैं। इस बीच संसद की अगली बैठक कब होगी और मौजूदा सत्र का औपचारिक सत्रावसान कब किया जाएगा, इसे लेकर अभी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
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