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समलैंगिक प्रेम : दोनों लड़कियों को अलग करने में परिजन और पुलिस की कोशिशें फेल, करने जा रही शादी

Nil dhankar
27 April 2026 6:31 AM IST
समलैंगिक प्रेम : दोनों लड़कियों को अलग करने में परिजन और पुलिस की कोशिशें फेल, करने जा रही शादी
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यूपी। मुरादाबाद जिले के बिलारी कोतवाली क्षेत्र में रविवार को एक ऐसी घटना सामने आई जिसने सामाजिक मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं को झकझोर कर रख दिया। दो युवतियों के बीच पनपे समलैंगिक प्रेम और उनके द्वारा एक-दूसरे के साथ शादी करने की जिद ने न केवल उनके परिवारों को लाचार कर दिया, बल्कि पुलिस प्रशासन के सामने भी कानून की सीमाएं खड़ी कर दीं। रुद्रपुर की एक फैक्ट्री में शुरू हुई यह प्रेम कहानी अब एक कानूनी और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन चुकी है।

घटना की जड़ें उत्तराखंड के रुद्रपुर से जुड़ी हैं। बिलारी कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली युवती कुछ समय पहले रुद्रपुर स्थित एक फैक्ट्री में काम करने गई थी। उसी फैक्ट्री में बिहार के आरा जिले की रहने वाली एक अन्य युवती भी काम करती थी। साथ काम करते-करते दोनों की दोस्ती गहरी होती गई और देखते ही देखते यह दोस्ती प्रेम में बदल गई। दोनों के बीच रिश्ता इतना प्रगाढ़ हो गया कि उन्होंने दुनिया की परवाह किए बिना साथ रहने और शादी करने का फैसला कर लिया। बताया जा रहा है कि वे पिछले कई महीनों से पति-पत्नी की तरह रह रही थीं। स्थानीय युवती जब लंबे समय तक घर नहीं लौटी तो उसके माता-पिता चिंतित हो गए। उसे वापस बुलाने के लिए परिजनों ने एक चाल चली और उसकी शादी तय होने का झूठा बहाना बनाकर उसे घर आने को कहा। युवती घर तो पहुंची, लेकिन वह अकेले नहीं थी। उसकी 'जीवनसाथी' भी उसके साथ थी। जब घर वालों ने दोनों के संबंधों के बारे में सुना तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। परिजनों ने समाज की दुहाई दी, मान-मर्यादा का वास्ता दिया और कई दिनों तक उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन युवतियों ने साफ कर दिया कि वे एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकतीं।

रविवार को जब घर का विवाद बेकाबू हो गया और युवतियां भागने की कोशिश करने लगीं, तो परिजन उन्हें लेकर बिलारी कोतवाली पहुंचे। परिजनों को उम्मीद थी कि पुलिस की डांट-फटकार और कानूनी डर से उनकी बेटियां मान जाएंगी। थाने में घंटों हाई-वोल्टेज ड्रामा चला। एक तरफ लाचार परिजन थे, तो दूसरी तरफ अपनी जिद पर अड़ी दो युवतियां। कोतवाल ने जब दोनों के बयान दर्ज किए, तो मामला कानूनी पेंच में फंस गया। दोनों युवतियों ने अपने हाईस्कूल के प्रमाण पत्र दिखाते हुए बताया किया कि वे बालिग हैं। उन्होंने पुलिस को दो-टूक शब्दों में कहा कि संविधान उन्हें अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है। पुलिस अधिकारियों ने भी कानून की किताबों का हवाला देते हुए परिजनों को अपनी लाचारी जताई। पुलिस ने स्पष्ट किया कि चूंकि दोनों बालिग हैं, इसलिए उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध कहीं भी ले जाना या कैद करना अपराध होगा। अंत में पुलिस ने दोनों युवतियों को उनकी मर्जी से रहने के लिए स्वतंत्र कर दिया। पुलिस के हाथ खड़े करने के बाद दोनों परिवार पूरी तरह लाचार नजर आए। देर शाम तक परिजन उन्हें मनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन युवतियां एक-दूसरे का हाथ थामे अपनी नई दुनिया बसाने के लिए निकल गईं।


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