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केरल में सड़क पर उतरे लेफ्ट छात्र संगठन, यूडीएफ सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
Shantanu Roy
24 Jun 2026 2:59 PM IST

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Thiruvananthapuram. तिरुवनंतपुरम। लगभग एक दशक बाद केरल की सड़कों पर एक बार फिर माकपा के युवा और छात्र संगठनों की सक्रियता दिखाई दी। वामपंथी युवा संगठन डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) और छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने बुधवार को कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन किए, जिनके दौरान कई स्थानों पर पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं। वर्ष 2016 से पिनराई विजयन के नेतृत्व में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के सत्ता में रहने के कारण माकपा का पारंपरिक आंदोलनकारी तंत्र लंबे समय से शांत था, लेकिन मई में हुए विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की जीत और वी.डी. सतीशन के मुख्यमंत्री बनने के बाद वामपंथी संगठनों ने फिर से सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया है।
बुधवार को राज्यभर में डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं ने यूडीएफ सरकार पर शराब कंपनियों को कर में रियायत देने के फैसले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किए। कई जगहों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पानी की बौछारें कीं और लाठीचार्ज का सहारा लिया। ये प्रदर्शन माकपा राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के नेतृत्व वाली पार्टी राज्य सचिवालय द्वारा जारी बयान के बाद आयोजित किए गए थे। मई में हार के बाद यह डीवाईएफआई का पहला समन्वित राज्यव्यापी आंदोलन माना जा रहा है। उधर, एसएफआई कार्यकर्ताओं ने सहकारी शिक्षण संस्थानों में फीस वृद्धि के विरोध में राज्य सचिवालय तक मार्च निकाला। इस दौरान कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई। आरोप है कि डीवाईएफआई और एसएफआई कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री सतीशन और कांग्रेस समर्थित संगठनों के नेताओं की तस्वीरों वाले होर्डिंग्स और फ्लेक्स बोर्डों को नुकसान पहुंचाया।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बुधवार का प्रदर्शन विपक्ष के रूप में माकपा के आक्रामक अभियान की शुरुआत का संकेत है। 18 मई को यूडीएफ सरकार के सत्ता संभालने के बाद से ही वामपंथी दल सरकार के फैसलों और बजट पर लगातार नजर रखे हुए हैं। डीवाईएफआई की सड़कों पर वापसी के साथ उसके कुछ पुराने उग्र आंदोलनों की यादें भी ताजा हो गई हैं। इनमें सबसे चर्चित वह घटना थी, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिनराई विजयन की बेटी से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान विपक्ष के नेता के किराये के मकान पर छापेमारी की थी। उस समय वहां से लौट रहे अधिकारियों पर वामपंथी कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया था, जिसके बाद कई गिरफ्तारियां हुई थीं। हालांकि बुधवार के प्रदर्शन उस स्तर तक नहीं पहुंचे, लेकिन राजनीतिक रूप से उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि दस वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद माकपा अब विपक्ष की भूमिका में लौट आई है और उसके साथ ही सड़क की राजनीति भी फिर से सक्रिय हो गई है।
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