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नई दिल्ली New Delhi: भारत का लेदर सेक्टर अब पारंपरिक उत्पादन से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में तेजी से बदलाव की ओर देख रहा है। सरकार और उद्योग दोनों का मानना है कि वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग और नए व्यापार समझौतों के चलते इस क्षेत्र में बड़े अवसर बन रहे हैं। इसी क्रम में भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को भी लेदर इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस समझौते के तहत ज़ीरो टैरिफ की व्यवस्था से भारतीय लेदर उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। टैरिफ कम होने या समाप्त होने से भारतीय उत्पाद न्यूज़ीलैंड के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यात की संभावनाएं मजबूत होंगी। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय लेदर सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और वैश्विक बाजार तक पहुंच का सही उपयोग करके यह सेक्टर वर्ष 2030 तक 50 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में लेदर उद्योग के पास न केवल उत्पादन क्षमता है, बल्कि गुणवत्ता और कुशल श्रमिकों की उपलब्धता भी इसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाती है।
लेदर सेक्टर लंबे समय से भारत के निर्यात आधारित उद्योगों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। यह उद्योग जूते, बैग, परिधान और अन्य लेदर उत्पादों के निर्माण में बड़ी संख्या में रोजगार प्रदान करता है। अब हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ने से इसमें तकनीक, डिजाइन और ब्रांडिंग पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
सरकारी नीतियों के अनुसार, इस क्षेत्र में मूल्य संवर्धन (value addition) बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि कच्चे माल के निर्यात की बजाय तैयार उत्पादों का निर्यात बढ़ सके। इससे न केवल निर्यात मूल्य में वृद्धि होगी, बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
FTA के माध्यम से भारत को न्यूज़ीलैंड जैसे विकसित बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय कंपनियों को अपने उत्पादों के लिए नए ग्राहक मिलेंगे और वैश्विक ब्रांड बनने का अवसर भी मिलेगा। उद्योग जगत का मानना है कि यह समझौता छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक लेदर बाजार में लगातार बदलाव हो रहे हैं और उपभोक्ता अब गुणवत्ता के साथ-साथ टिकाऊ और आधुनिक डिजाइन वाले उत्पादों की मांग कर रहे हैं। ऐसे में भारत का यह सेक्टर यदि तकनीक और नवाचार को अपनाता है, तो वह वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
लेदर उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार की नीतिगत सहायता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते इस क्षेत्र को नई दिशा दे रहे हैं। इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि निर्यात बाजारों में भारत की हिस्सेदारी भी मजबूत होगी।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इस क्षेत्र में सही रणनीति अपनाता है, तो यह सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। खासकर रोजगार सृजन और विदेशी मुद्रा अर्जन के लिहाज से यह उद्योग और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा।
कुल मिलाकर, भारत का लेदर सेक्टर अब एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहां वह पारंपरिक उत्पादन से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू और वैश्विक स्तर की मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। सरकार की नीतियां, अंतरराष्ट्रीय समझौते और उद्योग की क्षमता मिलकर इसे आने वाले वर्षों में एक मजबूत वैश्विक उद्योग बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।
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