जज दिनेश कुमार शर्मा की अदालत में शामिल नहीं होंगे वकील, कड़ा विरोध जताया

कलकत्ता। दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा के कलकत्ता हाईकोर्ट में ट्रांसफर से विवाद खड़ा हो गया है। CJI यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखे जाने के बाद अब तीन वकील संगठनों ने फैसला किया है कि वे जस्टिस शर्मा की अदालत में हो रही सुनवाई में शामिल नहीं होंगे। केंद्र सरकार ने मंगलवार को ही जस्टिस शर्मा के ट्रांसफर की अधिसूचना जारी की है।
कलकत्ता हाईकोर्ट के तीन वकील संगठनों ने जस्टिस शर्मा की सुनवाई में नहीं जाने का फैसला किया है। इससे पहले वकीलों ने सीजेआई संजीव खन्ना को 28 पत्र लिखकर जस्टिस शर्मा के तबादले का विरोध किया था। पत्र के जरिए फैसले पर दोबारा विचार करने और इसे वापस लेने का अनुरोध किया गया था। कुछ दिनों पहले ही सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस शर्मा के ट्रांसफर की सिफारिश की थी। 28 मार्च को इनकॉर्पोरेटेड लॉ सोसाइटी ऑफ कलकत्ता, बार एसोसिएशन ऑफ हाईकोर्ट और बार लाइब्रेरी क्लब हाईकोर्ट ने सीजेआई खन्ना को पत्र लिखा था, जिसमें जस्टिस शर्मा के ट्रांसफर के फैसले पर आपत्ति जताई गई थी। संगठनों ने लिखा था, 'हमारे पास यह मानने के कई कारण हैं कि यह तबादला कुछ आरोपों के कारण हुआ है, जो जज के काम करने के तरीकों से जुड़े हुए हैं। हम अक्टूबर 2024 से दिल्ली हाईकोर्ट में उनके कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ लगे गंभीर शिकायतों से परिचित हैं।'
जस्टिस शर्मा ने हाल ही में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों के निलंबर आदेशों पर रोक लगा दी थी। साल 2019 में CAA यानी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी किए गए थे। बीते साल नवंबर में जस्टिस शर्मा ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर मेट्रिक्स सेल्युलर इंटरनेशनल सर्विसेज और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया था।
जस्टिस शर्मा ने हाल ही में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों के निलंबर आदेशों पर रोक लगा दी थी। साल 2019 में CAA यानी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी किए गए थे। बीते साल नवंबर में जस्टिस शर्मा ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर मेट्रिक्स सेल्युलर इंटरनेशनल सर्विसेज और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया था।





