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BIG BREAKING: कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, उम्रकैद की सजा पर लगी रोक
Shantanu Roy
23 Dec 2025 3:39 PM IST

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बड़ी खबर
New Delhi. नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप कांड में सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सेंगर को उम्रकैद की सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए जमानत मंजूर कर दी है। इस जमानत पर कोर्ट ने 15 लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड और तीन समान राशि की जमानतें तय की हैं। हालांकि, सेंगर के लिए कुछ कड़े शर्तें भी रखी गई हैं।
जमानत और शर्तें
दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया है कि सेंगर को पीड़िता के 5 किलोमीटर के दायरे में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, सेंगर को अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और वह हर सोमवार थाने में हाजिरी लगाएगा। अदालत ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सेंगर न तो पीड़िता के करीब जाएगा, न ही उसे या उसके परिवार को किसी भी तरह की धमकी देगा।
मामला और पृष्ठभूमि
उन्नाव रेप मामला 2017 का है। उस समय एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया था। मामले ने तब राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा जब पीड़िता ने न्याय न मिलने के चलते सीएम हाउस के बाहर आत्मदाह की कोशिश की। इसके बाद पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत और पीड़िता की कार का संदिग्ध एक्सीडेंट जैसे घटनाक्रमों ने पूरे देश में आक्रोश फैला दिया। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मामला दिल्ली ट्रांसफर हुआ। वर्ष 2019 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। सेंगर ने इस सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट का निर्णय
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि अपील लंबित रहने तक सेंगर की उम्रकैद की सजा प्रभावी नहीं रहेगी। यह आदेश अस्थायी है और केवल अपील की प्रक्रिया पूरी होने तक लागू रहेगा। कोर्ट ने सेंगर को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि वह कानून का उल्लंघन नहीं करेगा और पीड़िता के सुरक्षा और मानसिक शांति को खतरा नहीं पहुँचाएगा।
प्रतिक्रिया और विवाद
सेंगर की जमानत पर कई जगहों पर सामाजिक और राजनीतिक विवाद भी सामने आया है। पीड़िता और उनके परिवार ने अभी तक इस आदेश पर प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे चिंता का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक आरोपी को जमानत देना पीड़िता और समाज के लिए असुरक्षा की भावना पैदा कर सकता है। हाईकोर्ट का यह कदम न्यायिक प्रक्रिया और अपील के अधिकार का हिस्सा है, लेकिन इसके साथ ही पीड़िता की सुरक्षा और न्याय की संवेदनशीलता को ध्यान में रखना अनिवार्य है। सेंगर के खिलाफ अपील की सुनवाई अब हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगी, और अंतिम निर्णय आने तक उनकी उम्रकैद की सजा स्थगित रहेगी।
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