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रंगोत्सव में डूबा किशनगढ़ शह, बादशाह ने आमजन में लुटाई खर्ची

Shantanu Roy
26 March 2024 3:10 PM IST
रंगोत्सव में डूबा किशनगढ़ शह, बादशाह ने आमजन में लुटाई खर्ची
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सिरोही। सिरोही शहर में सोमवार को रंगोत्सव मनाया गया। सवेरे से ही युवाओं और बच्चों की टोलियां घरों से बाहर निकल पड़ी और एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी। हर कोई होली के रंग में ऐसा रंगा नजर आया कि चारों ओर उल्लास और आनंद देखने को मिला। कई जगहों पर लोग फागुन के गीतों पर थिरकते नजर आए तो कई जगहों पर पारंपरिक फाग उत्सव भी मनाया गया। शहर में कई संस्थाओं की ओर से भी बादशाह की सवारी धूमधाम से निकाली गई। धुलंडी पर पुराना शहर में परंपरागत रूप से धानमंडी से बोहराजी यानी बादशाह की सवारी रवाना हुई, तो पूरा शहर रंगों में डूब गया। परंपरानुसार बादशाह ने गुलाल के रूप में ख़र्ची लुटाई तो लूटने वालों ने भी जी-भर कर ख़र्ची लूटी। बादशाह ने लोगों को गुलाल रूपी खर्ची लुटाई। हर शख्स इस गुलाल को लूटने के लिए लालायित रहा। मान्यता है कि बादशाह की गुलाल रूपी ख़र्ची को गुल्लक में रखने पर बरकत होती है। विभिन्न मार्गों से होते हुए बादशाह की सवारी धानमंडी चौक पहुंच विसर्जित हुई।
बादशाह की सवारी जिन-जिन मार्गों से गुजरी वहां की सड़कें गुलाल से अट गईं। ट्रैक्टर पर सवार बादशाह और शहजादे ने गुलाल रूपी खर्ची दिल खोलकर शहरवासियों में लुटाई। पुराना शहर में धानमंडी से बादशाह की सवारी रवाना होने के बाद पिनारी चौक, कचहरी चौक, सदर बाजार, जामड़ों का मोहल्ला, नया शहर खिड़की गेट, छीपों का मोहल्ला, सब्जी मंडी, सरवाड़ी गेट होते हुए धानमंडी पहुंच कर विसर्जित हुई। शहर में ‘आओ बादशाह-झूमो बादशाह...‘ गीत गूंजता रहा। जहां से भी सवारी निकली वहां गुलाल की चादर बिछ गई। लोगों ने बादशाह के सामने हाथ फैलाकर ‘बादशाह खर्ची दे, बादशाह की फतह हो..‘ पुकार की। सवारी का मुख्य आकर्षण बीरबल का घूमर नृत्य रहा।
मान्यता के अनुसार मुगल शासन में राजा अकबर बादशाह के दरबार में नौ रत्न थे। इनमें टोडरमल अग्रवाल भी शामिल थे। एक दिन टोडरमल ने जादुई करिश्मे से बादशाह को आखेट के वक्त जंगल में उपकरण व मुद्रा उपलब्ध कराए। इससे खुश होकर बादशाह ने टोडरमल को तीन घंटे की बादशाहत प्रदान की थी। अकबर बादशाह की इसी याद को ताजा रखने के लिए मुगलकाल से होली के त्यौहार पर धुलंडी के दूसरे दिन बादशाह की सवारी निकाली जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी रहा उत्साह उपखंड मुख्यालय समेत आस-पास के गांव मंगलवार को अबीर व गुलाल से सरोबार रहे। कई स्थानों पर लोगों ने चंग और ढोलक की थाप पर होली का आनन्द लिया। शहर के विभिन्न मोहल्ले के लोगों ने समूह बनाकर अबीर व गुलाल से होली खेली। रंगों के त्योहार का युवा वर्ग के साथ बड़े बुजुर्गों ने भी जमकर आनन्द लिया। ढोलक व चंग की थाप पर शहर के लोग नृत्य करते हुए तथा अबीर-गुलाल उछालते रहे।
होली पर्व पर नवविवाहित जोड़ों ने भी जमकर होली का आनन्द लिया। कई मोहल्ले में महिलाओं ने भी समूह में चंग और ढोलक की थाप पर नृत्य करते हुए होली खेली। विभिन्न समाजों की गेर में फाल्गुनी गीतों पर महिलाएं नृत्य करती चल रही थी। नवयुवकों के साथ महिलाओं का समूह भी ढोल की थाप पर नृत्य करती चल रही थी। शहरवासियों ने सुबह जमकर होली खेली। दोपहर एक बजे बाद राम राम का दौर चला। शहरवासियों ने अपने अपने सगे संबंधियों, दोस्तों के घर जाकर होली की रामा-श्यामा की। इस अवसर पर कई मोहल्लों में ठंडाई सहित सहभोज का आयोजन किया गया। रूपनगढ़ क्षेत्र के गांवों भदूण, सिनोदिया, नोसल, भिलावट, कोटड़ी, जाजोता, नवां, निटूटी, रघुनाथपुरा, सुरसुरा, त्योद, जाखोलाई, सलेमाबाद, करकेड़ी तथा बुहारू, हरमाड़ा, तिलोनिया, नया गांव, रामपुरा, नलू, छोटा नरैना तथा अन्य गांव के लोगों ने चंग की थाप पर अबीर व गुलाल से होली खेली। उन्होंने घर-घर जाकर होली के गीत गाए तथा नृत्य का आनंद लिया। एक-दूसरे पर रंग बरसाए तथा अबीर व गुलाल एक दूसरे को लगाया। बांदरसिंदरी, पाटन व नलू क्षेत्र में भी होली का पर्व जमकर मनाया गया। लोगों ने जमकर अबीर व गुलाल से होली खेली।
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