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Kasaragod कासरगोड। केरल हाई कोर्ट ने केरल क्रिकेट एसोसिएशन के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कासरगोड के बडियाडका में बने क्रिकेट ग्राउंड को तोड़ने की प्रस्तावित कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इसको 'जनता की जरूरत' बताया और राज्य सरकार से कहा कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए। न्यायमूर्ति वीजू अब्राहम ने केसीए की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि जब तक सरकार अंतिम प्रशासनिक निर्णय नहीं लेती, तब तक ग्राउंड को तोड़ने पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी। साथ ही कोर्ट ने स्थानीय स्वशासन और राजस्व विभाग के प्रधान सचिवों को चार महीने के भीतर इस मामले में अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि जिला कलेक्टर की पहले की रिपोर्ट, जिसमें केसीए पर 1.09 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया था, वैज्ञानिक सर्वे के आधार पर नहीं थी। केसीए की मांग को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने उन्हें वैज्ञानिक सर्वे कराने के लिए आवेदन करने की अनुमति दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आवेदन मिलने पर संबंधित अधिकारी सटीक सर्वे करें और उसकी रिपोर्ट व नक्शे सरकार द्वारा सत्यापित किए जाएं।
करीब 40 सेंट नहर की जमीन से जुड़े आरोपों पर केसीए ने कोर्ट को बताया कि जमीन खरीदते समय वहां पानी होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं थे। कोर्ट ने जिला कलेक्टर की उस रिपोर्ट पर भी ध्यान दिया, जिसमें कहा गया था कि पानी के बहाव में बदलाव से स्थानीय पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।
इस विवाद को सुलझाने के लिए केसीए ने बडियाडका पंचायत को बराबर जमीन देने या विवादित जमीन को लंबे समय के लिए लीज पर लेने का प्रस्ताव दिया है। चूंकि पंचायत और पंचायत निदेशक पहले ही इन प्रस्तावों पर सहमति जता चुके हैं, इसलिए हाई कोर्ट ने सरकार को अंतिम निर्णय लेते समय इन प्रस्तावों पर विचार करने का निर्देश दिया है। इस मामले में केसीए की ओर से अधिवक्ता केएन अभिलाष ने पैरवी की।
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