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एक साल तक माता-पिता से रखा दूर, 16 साल की मेड को गर्म चाकू से दागने का आरोप

jantaserishta.com
8 Nov 2026 9:08 AM IST
एक साल तक माता-पिता से रखा दूर, 16 साल की मेड को गर्म चाकू से दागने का आरोप
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नाबालिग के साथ क्रूरता.

नई दिल्ली: दिल्ली के शाहीन बाग में एक घर से 16 वर्षीय किशोरी को मुक्त कराया गया। लड़की अबुल फजल एंक्लेव-2 स्थित एक घर में मेड के तौर पर काम कर रही थी और उसे करीब एक साल से उसके माता-पिता से दूर रखा गया था। पुलिस ने शनिवार को बताया कि नाबालिग से कथित तौर पर रोजाना 20 घंटे काम कराया जाता था, उसे गर्म प्रेस और चाकू से बार-बार दागा जाता था और कई दिनों तक खाना भी नहीं दिया जाता था।

पुलिस ने कहा कि यह मामला तब उजागर हुआ, जब बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले एनजीओ एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी ऐक्शन ने शिकायत दी थी। कालकाजी के एसडीएम के निर्देश पर 3 और 4 नवंबर को श्रम विभाग, दिल्ली पुलिस और गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
पुलिस ने बताया कि अभियान के दौरान शाहीन बाग की श्रम विहार झुग्गी की रहने वाली लड़की को अबुल फजल एंक्लेव-2 स्थित एक घर से मुक्त कराया गया। वहां सदफ नाम की एक महिला उससे कथित तौर पर घरेलू काम कराती थी। नाबालिग ने अपने बयान में बताया कि उससे सुबह 6 बजे से रात 2 बजे तक काम कराया जाता था और इस दौरान उसे झाड़ू-पोछा लगाने, बर्तन धोने और घर की सफाई जैसे काम करने पड़ते थे। उसने बताया कि उसे सुबह करीब 11 बजे चाय दी जाती थी और अक्सर बचा हुआ खाना परोसा जाता था। नाबालिग ने आरोप लगाया कि जिस घर में वह काम करती थी, उसमें रहने वाली महिला उसे बार-बार गर्म प्रेस से पीठ, हाथों और कूल्हों पर दागती थी। इतना ही नहीं, उसने यह भी आरोप लगाया कि गर्म चाकू से भी उसे चोट पहुंचाई गई।
एनजीओ के अनुसार, लड़की के शरीर पर कई चोटें और पुराने जख्मों के निशान मिले हैं, इनमें उसकी पीठ पर जलने के निशान व सिर पर गहरे घाव शामिल हैं। नाबालिग ने अधिकारियों को बताया कि एक बार उसे लगातार तीन दिनों तक खाना और पानी नहीं दिया गया था। छोटी-छोटी गलतियों पर उसकी पिटाई भी की जाती थी और उसे डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय मेडिकल स्टोर से खरीदी गई दवाएं दी जाती थीं।
पुलिस के अनुसार, नाबालिग का यह भी आरोप है कि उसे अपने माता-पिता से मिलने से भी रोका जाता था। पुलिस ने बताया कि करीब एक साल के दौरान उसे माता-पिता से फोन पर केवल दो-तीन बार बात करने की अनुमति दी गई।
एनजीओ ने आरोप लगाया कि इन फोन कॉल के दौरान नाबालिग का चेहरा ढक दिया जाता था, ताकि उसके माता-पिता शरीर पर चोटों के निशान न देख सकें। नाबालिग शुरू में अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने से काफी डरी हुई थी, क्योंकि उसे कथित तौर पर दुर्व्यवहार के बारे में बताने पर जान से मारने की धमकी दी गई थी। बाद में उसने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष आपबीती सुनाई। उसका बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया गया और उसे समिति के सामने पेश किया गया। समिति ने उसे इलाज के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराने का निर्देश दिया।
एसडीएम ने शाहीन बाग थाने को बाल एवं किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 और किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया। इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
एनजीओ ने बताया कि नाबालिग को एक अन्य महिला ने इस घर में काम पर लगवाया था और करीब एक साल तक काम कराने के बदले उसे केवल 18,000 रुपये दिए गए थे। समिति ने बाल कल्याण समिति को बताया कि वह दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहती है और शिक्षिका बनना चाहती है।
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