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सूखे पर बड़ी चर्चा विधानसभा सत्र एक दिन और बढ़ाया
Bangalore. बेंगलुरु। कर्नाटक में गंभीर होती सूखे की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विधानसभा के विशेष सत्र को एक दिन और बढ़ाने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 200 से अधिक तालुक सूखे से प्रभावित हो सकते हैं और इस गंभीर मुद्दे पर विधानसभा में व्यापक चर्चा जरूरी है। उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर देने के लिए सत्र को एक दिन आगे बढ़ाया गया है। शिवकुमार ने कहा कि सूखे की स्थिति बेहद गंभीर है और वह चाहते हैं कि सभी विधायक इस चर्चा में हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि सूखे से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जरूरत है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि अपने इलाकों की वास्तविक स्थिति सदन के सामने रख सकें।
मुख्यमंत्री के मुताबिक चर्चा के बाद राजस्व मंत्री सदन में सरकार की ओर से जवाब देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उपमुख्यमंत्री भी इस मुद्दे पर जवाब देंगे। सरकार का जोर सूखे से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, किसानों की समस्याओं और राहत उपायों पर चर्चा करने पर है। कर्नाटक में कमजोर मानसून के कारण कई क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। सितंबर के मध्य में शिवकुमार ने कहा था कि राज्य के 239 तालुकों में से 200 से अधिक सूखे का सामना कर रहे हैं। उस समय 101 तालुक पहले ही सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके थे और अन्य क्षेत्रों को शामिल करने की प्रक्रिया चल रही थी।
बाद में आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित तालुकों की संख्या बढ़कर 124 हो गई, जबकि अन्य क्षेत्रों में भी स्थिति का आकलन किया जा रहा है। राज्य में कम बारिश के कारण फसलों के नुकसान के साथ पेयजल, भूजल और बिजली आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं। इससे पहले 21 से 23 सितंबर तक विशेष विधायी सत्र बुलाया गया था, जिसमें सूखे की स्थिति के साथ पश्चिमी घाट से संबंधित कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा प्रमुख एजेंडे में शामिल थी। विपक्ष ने सत्र की अवधि बढ़ाकर इन मुद्दों पर ज्यादा चर्चा कराने की मांग भी की थी।
वहीं दिल्ली जाने वाले प्रस्तावित सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को लेकर मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि वह खुद इसका नेतृत्व करेंगे। इससे पहले भी उन्होंने केंद्र सरकार से सूखे से प्रभावित किसानों के लिए सहायता और कृषि ऋण माफी के मुद्दे पर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली जाने की बात कही थी। राज्य सरकार का कहना है कि सूखे की स्थिति का विस्तृत आकलन कर केंद्र के सामने राहत से जुड़ी मांगें रखी जाएंगी। विधानसभा में होने वाली चर्चा के जरिए विभिन्न क्षेत्रों के विधायकों से जमीनी स्थिति की जानकारी भी सामने आने की उम्मीद है।
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