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किंग कोबरा रेस्क्यू के लिए विशेष टीम बनेगी, वन विभाग ने उठाया कदम
jantaserishta.com
24 Nov 2025 5:31 PM IST

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बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने राज्य के पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में किंग कोबरा बचाव कार्यों के नाम पर हो रहे दुरुपयोग और गलत गतिविधियों को रोकने के लिए एक विशेष रेस्क्यू टीम गठित करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी सोमवार को वन विभाग के अधिकारियों ने दी। जहां-जहां किंग कोबरा पाए जाते हैं, उन सभी वन क्षेत्रों में क्षेत्रीय वन अधिकारी (आरएफओ) को पांच कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया गया है।
पर्यावरणविदों ने इस कदम का स्वागत किया है और कहा कि इससे पश्चिमी घाट में शोध के नाम पर किंग कोबरा के शोषण पर रोक लगेगी। उनका आरोप है कि कुछ स्वयंसेवी संगठनों (एनजीओ) और निजी संस्थानों ने वन्यजीव अधिनियम का उल्लंघन किया है और इनके खिलाफ जांच की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि किंग कोबरा के काटने से मौत या स्थानीय लोगों द्वारा सांप को मारने की अब तक कोई दर्ज घटना नहीं है, लेकिन मानव–किंग कोबरा संघर्ष की एक गलत कहानी फैलाकर इसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।
वन मंत्री ईश्वर खंडरे ने कहा कि हाथी टास्क फोर्स (ईटीएफ) और तेंदुआ टास्क फोर्स (एलटीएफ) की तर्ज पर अब किंग कोबरा रेस्क्यू के लिए विशेष टीम बनाई जा रही है, ताकि इस क्षेत्र में होने वाले दुरुपयोग को रोका जा सके।
यह निर्णय चिक्कमंगलुरु जिले के अज्जमपुरा में अधिकारियों के साथ बैठक के बाद लिया गया। मंत्री ने निर्देश दिया कि निजी संस्थानों पर निर्भर रहने के बजाय वन विभाग के पांच कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर किंग कोबरा को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और जंगल में छोड़ने की व्यवस्था की जाए।
हाल के दिनों में चिक्कमंगलुरु, उत्तर कन्नड़, शिवमोग्गा और उडुपी जिलों में किंग कोबरा की मौजूदगी बढ़ी है। सांप अब जंगलों के अलावा घरों और बागानों में भी देखे जा रहे हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल है।
वन मंत्री ने कहा कि अब निजी विशेषज्ञों या संगठनों की आवश्यकता नहीं है। प्रशिक्षित सरकारी कर्मचारी ही सुरक्षित रूप से सांप को पकड़ेंगे और जंगल में वापस छोड़ेंगे। इसके लिए क्षेत्रीय वन अधिकारी के नेतृत्व में पांच प्रशिक्षित कर्मियों की टीम तैनात होगी।
इससे पहले कुछ एनजीओ के खिलाफ शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिन पर पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों और शोध अनुमति के दुरुपयोग का आरोप लगा था। इन गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि केवल अधिकृत कर्मी ही किंग कोबरा रेस्क्यू का काम कर सकें।
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