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CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ी

SHIDDHANT
19 Oct 2026 10:08 PM IST
सांकेतिक तस्वीर (AI)
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सांकेतिक तस्वीर (AI)

दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के मामले में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के आदेश की कॉपी सामने आई है। आदेश में दोनों नेताओं को 21 अक्टूबर 2026 तक न्यायिक हिरासत में रखने के कारणों का उल्लेख किया गया है। मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं के आचरण, पूर्व में प्रस्तुत बॉन्ड के कथित उल्लंघन और जमानतदारों की विश्वसनीयता को लेकर कई गंभीर टिप्पणियां की हैं।
बॉन्ड तोड़ने और शांति भंग करने का आरोप
आदेश के अनुसार, दोनों नेताओं ने 11 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत किए गए बॉन्ड की शर्तों का जानबूझकर उल्लंघन किया और सार्वजनिक शांति भंग की। मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी की ओर से प्रस्तुत सामग्री और दोनों नेताओं के आचरण का हवाला देते हुए उनके रवैये पर सवाल उठाए। आदेश में कहा गया कि दोनों प्रतिवादी कानून के प्रति सम्मान नहीं दिखाते और प्रतिबंधित क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं। मजिस्ट्रेट ने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की गतिविधियां नहीं दोहराने का दोनों नेताओं का आश्वासन उपलब्ध रिकॉर्ड को देखते हुए भरोसेमंद नहीं पाया गया।
जमानतदारों की पहचान पर उठे गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं की ओर से पेश किए गए नए जमानतदारों की व्यक्तिगत जांच की गई। मजिस्ट्रेट के अनुसार, एक जमानतदार के बॉन्ड और पहचान पत्र में लगी तस्वीरों के बीच स्पष्ट अंतर मिला। अतिरिक्त पहचान पत्र मांगे जाने पर वह कोई अन्य दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। वहीं, दूसरा जमानतदार उस व्यक्ति के माता-पिता का नाम और पता जैसी बुनियादी जानकारी भी नहीं बता पाया, जिसके लिए वह जमानत देने पहुंचा था। मजिस्ट्रेट ने माना कि दोनों जमानतदार आरोपियों को आवश्यकतानुसार पेश कराने और उनकी शर्तों का पालन सुनिश्चित करने की क्षमता प्रदर्शित नहीं कर सके।
21 अक्टूबर तक बढ़ाई गई न्यायिक हिरासत
आदेश में सार्वजनिक शांति भंग होने और अव्यवस्था फैलने की आशंका का उल्लेख किया गया है। मजिस्ट्रेट ने इन परिस्थितियों को देखते हुए दोनों नेताओं की हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके साथ ही दोनों पक्षों को दो दिनों के भीतर लिखित जवाब और नए जमानतदारों की सूची प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।
CJP के वकीलों ने आदेश पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, CJP की कानूनी टीम ने मजिस्ट्रेट के फैसले पर आपत्ति जताई है। पार्टी के वकीलों का दावा है कि जमानतदारों को बार-बार खारिज करना कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के विपरीत है। वकीलों के अनुसार, पिछले चार दिनों में आठ अलग-अलग व्यक्तियों को जमानतदार के रूप में खारिज किया जा चुका है। CJP ने इस कार्रवाई की मंशा और दोनों नेताओं की हिरासत की वैधता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, मजिस्ट्रेट के आदेश में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और जमानतदारों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने को हिरासत बढ़ाने का आधार बताया गया है।
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