भारत

10 साल की बच्ची के नाम जज का खास लेटर, कहा- अपनी जिंदगी जियो

Shantanu Roy
29 Sept 2026 3:27 PM IST
10 साल की बच्ची के नाम जज का खास लेटर, कहा- अपनी जिंदगी जियो
x
बड़ी खबर
New Delhi. नई दिल्ली। दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट जज ने रेप पीड़ित बच्ची के लिए फैसला सुनाने के बाद एक खास पत्र लिखा था। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पत्र को बच्ची और उसके परिवार तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इसे ‘करेज नोट’ यानी साहस का संदेश बताया है। नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को निर्देश दिया गया है कि वह पत्र को प्रिंट करवाकर दो सप्ताह के भीतर बच्ची तक पहुंचाए। इस पत्र में जज रजनी रंगा ने बच्ची की हिम्मत की सराहना करते हुए उसके आगे के जीवन को लेकर भावनात्मक संदेश दिया है।
7 साल की उम्र में दर्ज कराई थी शिकायत
यह मामला 23 जुलाई 2023 का है। उस समय बच्ची की उम्र 7 साल थी। उसके माता-पिता ने सुमित शक्य के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज कराई थी। बच्ची आरोपी को ‘अंकल’ कहकर बुलाती थी। मामले की सुनवाई के दौरान बच्ची ने अदालत के सामने अपनी बात रखी थी। उसने कोर्ट से कहा था कि आरोपी को तब तक जेल में रखा जाए, जब तक वह बूढ़ा न हो जाए। बाद में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को गंभीर यौन अपराध के मामले में दोषी ठहराया।
जज ने पत्र में बच्ची की हिम्मत को सराहा
जज रजनी रंगा ने अपने पत्र की शुरुआत ‘डियर चाइल्ड’ शब्दों से की। उन्होंने बच्ची के अदालत में आकर अपनी बात रखने और आरोपी की पहचान करने की हिम्मत की तारीफ की। पत्र में जज ने कहा कि बच्ची ने डरकर चुप रहने के बजाय अपनी मां को पूरी घटना बताई। उसके सच बोलने और हिम्मत दिखाने से आरोपी को किसी दूसरे बच्चे को नुकसान पहुंचाने से रोकने में मदद मिली। जज ने यह भी कहा कि अदालत बच्ची की बहादुरी को याद रखेगी।
‘अंकल’ को लेकर भी लिखा खास संदेश
जज ने बच्ची को बताया कि अदालत ने उसकी बात सुनी है और आरोपी को अपनी जिंदगी के बाकी समय तक जेल में रहना होगा। पत्र में कहा गया कि वह जेल में ही बूढ़ा होगा और वहीं उसकी जिंदगी खत्म होगी। जज ने बच्ची को यह भरोसा भी दिलाया कि आरोपी अब उसे, उसकी छोटी बहन या किसी अन्य बच्चे को दोबारा नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। पत्र के अंत में जज ने बच्ची को आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने उसे स्कूल जाने, दोस्त बनाने, हंसने, खेलने और अपने सपने देखने के लिए कहा।
आरोपी को उम्रभर जेल और बच्ची के लिए मुआवजा
सुमित शक्य को POCSO कानून के तहत 12 साल से कम उम्र की बच्ची के खिलाफ गंभीर यौन अपराध के मामले में प्राकृतिक जीवन के बाकी हिस्से तक कठोर कारावास की सजा दी गई है। इसके अलावा उस पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। आपराधिक धमकी के मामले में उसे 5 साल की कठोर कैद और 20 हजार रुपये का जुर्माना मिला है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। ट्रायल कोर्ट ने बच्ची के लिए 10.50 लाख रुपये के मुआवजे का भी फैसला किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने DLSA सचिव से इस रकम के भुगतान की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है।
हाईकोर्ट ने जमानत देने से ...
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषी की सजा पर तत्काल रोक लगाने और उसे जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट सहित अन्य सबूतों को भी ध्यान में रखा। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी, जबकि आरोपी की अपील 20 जनवरी 2027 को सूचीबद्ध है। हाईकोर्ट ने DLSA से मुआवजे की स्थिति की जानकारी भी मांगी है। NCRB के मुताबिक, 2024 में दिल्ली में POCSO के 1,553 मामले दर्ज हुए थे। यानी उस साल औसतन हर दिन 4 से ज्यादा मामले सामने आए थे।
Next Story