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Jharkhand. झारखंड। झारखंड हाईकोर्ट ने रजरप्पा स्थित प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और सौंदर्यीकरण को लेकर अहम और सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने भैरवी नदी के डेंजर जोन में बरसात से पहले बैरिकेडिंग कार्य पूरा करने को प्राथमिकता देने को कहा है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह आदेश अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद शामिल थे, द्वारा दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भैरवी नदी के किनारे चिन्हित खतरनाक क्षेत्रों में मजबूत बैरिकेडिंग का कार्य हर हाल में मानसून से पहले पूरा किया जाए। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि हर वर्ष यहां दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस परियोजना के लिए लगभग 50 लाख रुपये की लागत से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली गई है और जल्द ही कार्य शुरू किया जाएगा। जल संसाधन विभाग को इस कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कोर्ट ने मंदिर परिसर से हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास पर भी विशेष जोर दिया है। निर्देश दिया गया है कि सभी प्रभावित दुकानदारों को स्थायी दुकानें उपलब्ध कराई जाएं और उनसे निर्धारित किराया वसूला जाए। इससे दुकानदारों को स्थायित्व मिलेगा और सरकार को राजस्व भी प्राप्त होगा।
रामगढ़ के उपायुक्त ने जानकारी दी कि कुल 254 दुकानदारों के पुनर्वास की योजना तैयार कर ली गई है। मंदिर परिसर के पास ही एक उपयुक्त स्थान चिन्हित किया गया है, जहां इन दुकानों का निर्माण किया जाएगा। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए कोर्ट ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) को अपने CSR फंड के तहत मंदिर परिसर के पास एक अस्पताल स्थापित करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। इससे आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
इसके अलावा, हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर के समग्र विकास के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी जोर दिया है। इनमें स्थायी स्नान घाट, कपड़े बदलने की सुविधा, स्वच्छ शौचालय, पेयजल व्यवस्था, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और चिकित्सा सेवाओं का विस्तार शामिल है। साथ ही अतिक्रमण हटाने और भैरवी नदी के चौड़ीकरण पर भी काम करने को कहा गया है।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण और विकास के लिए विस्तृत योजना तैयार करने का काम चड्ढा एंड एसोसिएट नामक एजेंसी को सौंपा गया है। राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि सभी कार्य तय समय सीमा में पूरे कर लिए जाएंगे। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की है और रामगढ़ के उपायुक्त को अगली सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अदालत इस पूरे मामले की लगातार निगरानी कर रही है।
यह मामला पहले से लंबित जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है, जिसमें 2023 में भी हाईकोर्ट ने मंदिर परिसर के विकास और सुरक्षा से जुड़े निर्देश दिए थे। वर्तमान अवमानना याचिका उन आदेशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए दायर की गई थी। रजरप्पा मंदिर झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है। हाईकोर्ट के ताजा निर्देशों से उम्मीद की जा रही है कि यहां न केवल सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं भी मिलेंगी और क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।
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