Jammu: मेजबान होने के नाते मेरी जिम्मेदारी थी कि मैं सभी को यहां से सुरक्षित भेजूं: उमर अब्दुल्ला

दिल्ली: जम्मू कश्मीर विधानसभा ने सोमवार को पहलगाम में आतंकवादी हमले में मारे गए 26 लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए कुछ पल का मौन रखा। जैसे ही सदन का विशेष सत्र शुरू हुआ, विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर ने पहलगाम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए निर्दोष पर्यटकों की आतंकी हमले में हत्या किए जाने की निंदा की। सत्र के दौरान विधानसभा ने पहलगाम हमले की निंदा करने वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया, सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाले नापाक मंसूबों को विफल करने का संकल्प लिया।
विशेष सत्र के दौरान निंदा प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मुझे यकीन नहीं होता कि कुछ दिन पहले हम इस हाउस में थे। बजट और कई मुद्दों पर बहस हुई। अंतिम दिन हम चाय पी रहे थे और सोच रहे थे कि कश्मीर में अगला सत्र होगा। तब किसी ने नहीं सोचा था कि हमें यहां इस माहौल में मिलना पड़ेगा।
उमर अब्दुल्ला ने भावुक होते हुए कहा, ''मुख्यमंत्री, पर्यटन मंत्री होने के नाते हमने लोगों को न्योता दिया था यहां आने के लिए। मेजबान होने के नाते मेरी जिम्मेदारी थी कि मैं सभी को यहां से सुरक्षित भेजूं। नहीं भेज पाया। माफी मांगने के अल्फाज नहीं थे। क्या कहता उनको? छोटे बच्चों को... जिन्होंने अपने वालिद को खून में लिपटा देखा। उस नेवी अफसर के विधवा को, जिसकी शादी ही कुछ दिनों पहले हुई थी।''
उमर अब्दुल्ला ने कहा, ''मुझे कुछ लोगों ने पूछा था कि हमारा कसूर क्या है? हम कुछ दिन पहले ही पहली बार कश्मीर आए थे, छुट्टी मनाने के लिए और इस छुट्टी का अब हमें जिंदगी भर खामियाजा भुगतान पड़ेगा। जिन लोगों ने ये किया इस हमले ने हमें अंदर से खोखला कर दिया है।''
उमर अब्दुल्ला ने कहा, ''मैं उपराज्यपाल का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्होंने हमारी रिक्वेस्ट पर यह सत्र बुलाया। हमारे मंत्रिमंडल में जब इस हमले के बाद बैठक बुलाई इस समय तय हुआ कि हम उपराज्यपाल से गुजारिश करेंगे कि वह एक दिन का सेशन बुलाए। यह सेशन इसलिए बुलाया गया क्योंकि ना सांसद और ना कि किसी और राज्य की असेंबली उन लोगों के दुख दर्द को उतना समझती है जितना यह जम्मू कश्मीर के असेंबली।''
मुख्यमंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने के लिए सदन में प्रस्ताव पर हुई चर्चा को समाप्त करते हुए कहा, “आतंकवाद या उग्रवाद तभी खत्म होगा जब लोग हमारे साथ होंगे। आतंकवाद के खिलाफ लोगों के आक्रोश को देखते हुए, अगर हम उचित कदम उठाते हैं तो यह आतंक के खात्मे की शुरुआत है।”
उन्होंने कहा, “हमें ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे लोग अलग-थलग पड़ जाएं। हम बंदूक से आतंकवाद को नियंत्रित नहीं कर सकते लेकिन अगर लोग हमारे साथ हैं तो हम आतंकवाद को खत्म कर सकते हैं। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है।”
अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीनगर की जामिया मस्जिद में पहली बार शुक्रवार की नमाज से पहले दो मिनट का मौन रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम इसका मतलब समझ सकते हैं। हम इस बदलाव को और मजबूत बनाने की कोशिश करेंगे।”





