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जेल या बेल? स्वतंत्र भारद्वाज ने कोर्ट में गिनाईं ये वजहें, जमानत पर फैसला सुरक्षित

Shantanu Roy
14 Sept 2026 8:39 PM IST
जेल या बेल? स्वतंत्र भारद्वाज ने कोर्ट में गिनाईं ये वजहें, जमानत पर फैसला सुरक्षित
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नई दिल्ली। नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान हुई मारपीट के मामले में SC-ST एक्ट के तहत गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर दिल्ली की अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत में सुनवाई के दौरान भारद्वाज की ओर से कई दलीलें रखी गईं। बचाव पक्ष ने दावा किया कि जिस व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत की, हमला उसी ने किया था। वकील ने अदालत के सामने एक वीडियो का भी हवाला दिया। स्वतंत्र भारद्वाज फिलहाल 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल में हैं। उनकी ओर से अदालत में कहा गया कि गिरफ्तारी राजनीतिक घटनाक्रम के बाद की गई और पुलिस ने पहले उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं।

जंतर-मंतर विवाद के बाद हुई गिरफ्तारी
मामला जून में जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन के दौरान हुई कथित मारपीट से जुड़ा है। आरोप है कि आंदोलन शुरू होने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने एक दलित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के पिता के साथ मारपीट की थी। हाल ही में एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में स्वतंत्र भारद्वाज ने कथित तौर पर कहा था कि उन्होंने उनका सिर फोड़ दिया था, लेकिन राजनीतिक पहुंच के कारण उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। यह वीडियो सामने आने और वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ा। इसके बाद CJP नेताओं के साथ आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और कांग्रेस नेताओं ने संसद मार्ग थाने पहुंचकर शिकायत की। पुलिस ने SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और कुछ घंटे बाद स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया।

बचाव पक्ष ने वीडियो को बनाया आधार
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के वकील उमेश शर्मा ने अदालत के सामने दावा किया कि शिकायतकर्ता ने ही पहले उन पर हमला किया था। उनका कहना था कि पुलिस ने शिकायतकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। वकील ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत में उस वीडियो का हवाला दिया, जिसमें उनके मुताबिक शिकायतकर्ता की ओर से हमला किए जाने की बात दिखाई देती है। बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि अगर वीडियो में घटना का दूसरा पक्ष दिखाई दे रहा है तो पुलिस ने उस पर ध्यान क्यों नहीं दिया। भारद्वाज की ओर से यह भी कहा गया कि पुलिस ने 27 जून को पूछताछ के लिए नोटिस दिया था और वह 29 जून को जांच में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्हें जाने की अनुमति मिल गई थी। उनका दावा है कि बाद में राजनीतिक घटनाक्रम के बाद 4 सितंबर को उनकी गिरफ्तारी हुई।

गिरफ्तारी के बाद POCSO केस का भी जिक्र
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि SC-ST एक्ट के मामले के साथ-साथ भारद्वाज के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत भी एक मामला दर्ज किया गया। भारद्वाज की ओर से अदालत में कहा गया कि गिरफ्तारी के बाद नई FIR दर्ज की गई। वहीं शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील स्वाति खन्ना ने इन दलीलों का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारद्वाज ने शिकायतकर्ता के खिलाफ जातिगत टिप्पणियां की थीं और एक वीडियो में खुद हमले की बात स्वीकार की है। शिकायतकर्ता के पक्ष ने यह भी अदालत को बताया कि स्वतंत्र भारद्वाज ने दिल्ली हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था।

पुलिस ने जातिगत टिप्पणी पर दी अलग जानकारी
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि FIR दर्ज किए जाने के समय जातिगत अपशब्दों का आरोप नहीं लगाया गया था। बाद में शिकायतकर्ता का बयान दोबारा दर्ज किया गया और उसमें जातिगत टिप्पणी का आरोप सामने आने के बाद SC-ST एक्ट की संबंधित धाराएं जोड़ी गईं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत के फैसले से तय होगा कि उन्हें इस मामले में जेल से राहत मिलती है या उनकी न्यायिक हिरासत आगे जारी रहती है।
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