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गुरुद्वारों के लिए बने ‘ऑल इंडिया गुरुद्वारा एक्ट’, जगदीश सिंह झिंडा ने अकाल तख्त को सौंपा ज्ञापन

SHIDDHANT
3 Oct 2026 8:03 PM IST
गुरुद्वारों के लिए बने ‘ऑल इंडिया गुरुद्वारा एक्ट’, जगदीश सिंह झिंडा ने अकाल तख्त को सौंपा ज्ञापन
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अमृतसर। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के वरिष्ठ नेता जगदीश सिंह झिंडा ने देशभर के सिखों और ऐतिहासिक गुरुद्वारों के प्रबंधन को एक व्यवस्था के तहत लाने के लिए ‘ऑल इंडिया गुरुद्वारा एक्ट’ बनाने की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज को एक ज्ञापन सौंपा। झिंडा ने कहा कि वर्तमान समय में देश के अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग रहते हैं। ऐसे में गुरुद्वारों के प्रबंधन और सिख समुदाय से जुड़े धार्मिक मामलों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने इसी उद्देश्य से ऑल इंडिया गुरुद्वारा एक्ट की मांग रखी है।
उन्होंने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से संबंधित सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1925 तत्कालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। उस समय सिख आबादी मुख्य रूप से अविभाजित पंजाब में केंद्रित थी। 1947 में देश के विभाजन के बाद परिस्थितियां बदल गईं और सिख समुदाय देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर बस गया। झिंडा के अनुसार, आज दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में सिख समुदाय की बड़ी मौजूदगी है। उन्होंने कहा कि बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए पूरे देश के लिए एक समान गुरुद्वारा प्रबंधन कानून पर विचार किया जाना चाहिए।
HSGMC नेता ने दावा किया कि ऑल इंडिया गुरुद्वारा एक्ट बनने से देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के प्रबंधन में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा। इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों में रहने वाले सिखों को एक साझा धार्मिक प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी। ज्ञापन सौंपते हुए झिंडा ने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से इस मांग पर विचार करने और सिख समुदाय के व्यापक हित में पहल करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि यह मुद्दा किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में रहने वाले सिखों से जुड़ा हुआ है। फिलहाल ‘ऑल इंडिया गुरुद्वारा एक्ट’ झिंडा और उनके समर्थकों की ओर से उठाई गई मांग है। इस तरह के किसी राष्ट्रीय कानून को लागू करने के लिए संबंधित संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया की आवश्यकता होगी। इस मांग पर अन्य प्रमुख सिख संस्थाओं और संबंधित पक्षों का रुख भी महत्वपूर्ण रहेगा।
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