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भारत को लेकर इजरायल का बड़ा बयान आया

jantaserishta.com
27 May 2022 11:37 AM GMT
भारत को लेकर इजरायल का बड़ा बयान आया
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नई दिल्ली: बेंगलुरू में इजरायल की महावाणिज्य दूत टैमी बेन-हैम ने भारत-इजरायल रिश्तों को लेकर कहा है कि दोनों देशों के रिश्तों में फिलिस्तीन का अनसुलझा मुद्दा एक कारक हो सकता है लेकिन ये द्विपक्षीय साझेदारी को कम नहीं करता ना ही उसे नकारता है. टैमी ने इजरायल के जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस पर भी बात की और कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य आतंकवाद से लड़ना है. उन्होंने इस विवादित स्पाइवेयर को लेकर स्पष्ट किया कि इसे बस सरकारों को ही बेचा जाता है.

फिलिस्तीन के मुद्दे पर द हिंदू से बात करते हुए टैमी ने कहा, 'फिलिस्तीन एक मुद्दा हो सकता है. लेकिन मुझे लगता है कि अब्राहम समझौते से यह स्पष्ट हो गया था कि फिलिस्तीनी मुद्दा एक मुद्दा हो सकता है, ये असहमति का मुद्दा हो सकता है, तर्कों का मुद्दा हो सकता है, लेकिन ये रिश्तों को खत्म करने या नकारने का मुद्दा नहीं हो सकता.'
2020 में किए गए अब्राहम समझौते के तहत, इजरायल ने चार अरब देशों – यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे.
फिलिस्तीन के मुद्दे को लेकर इजरायल के संबंध कई देशों से खराब रहे हैं. लेकिन भारत के साथ इजरायल के संबंध हाल के वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं. नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के संबंध मजबूत हुए हैं. साल 2017 में पीएम मोदी इजरायल की आधिकारिक यात्रा पर जाने वाले पहले प्रधानमंत्री बने थे.
भारत-इजरायल संबंधों को लेकर टैमी ने कहा, 'भारत और इजरायल के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने, विश्वास बहाली और पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने में कुछ समय लगा. लेकिन कृषि, रक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों में अब सुधार हो रहा है.'
इजरायल की कंपनी एनएसओ द्वारा बनाए गए जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस को लेकर भारत सरकार पर आरोप लगे हैं कि इसका इस्तेमाल कर सरकार ने विपक्षी नेताओं, कई केंद्रीय मंत्रियों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के फोन का जासूसी की. मामले की जांच के लिए एक कमेटी जस्टिस रवींद्रन समिति बनाई गई है जो मामले पर अभी काम कर रही है. भारत सरकार हालांकि जासूसी से इनकार करती रही है.
पेगासस के आरोपों को लेकर टैमी ने कहा, 'इसे एक निजी कंपनी ने बनाया है. वो कोई हथियार कंपनी भी नहीं है. लेकिन फिर भी उन्हें निर्यात के लिए इजरायल की सरकार से मंजूरी लेनी होती है. इजरायल की सरकार की तरफ से ये स्पष्ट है कि इसका निर्यात केवल विशिष्ट उपयोग और विशिष्ट कारणों के लिए केवल सरकारों को किया जाता है. इसलिए कंपनी को ये साबित करना होगा कि वे नियमों का पालन करते हैं. हम सॉफ्टवेयर को बस सरकारों को बेचने की अनुमति देते हैं और सरकारें विशिष्ट कारणों से इसका इस्तेमाल कर रही हैं.'
जब टैमी से पूछा गया कि क्या NSO अपने सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की निगरानी करता है, उन्होंने जवाब दिया, 'मुझे यकीन है कि कॉन्ट्रैक्ट साइन किया जाता है और इस्तेमाल की शर्तें निर्धारित की जाती हैं. पेगासस का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद से लड़ना है.
ईरान परमाणु समझौते को लेकर टैमी ने कहा कि इजरायल ईरान के साथ बातचीत का विरोध नहीं करता लेकिन 2015 के परमाणु समझौते की वो हमेशा आलोचना करता रहेगा.
उन्होंने कहा, '2015 का परमाणु समझौता बहुत कमजोर था. यदि वे एक मजबूत और लंबे समझौते पर चर्चा कर रहे हैं जिसमें न केवल ईरान का परमाणु कार्यक्रम शामिल होगा बल्कि ईरान के रॉकेट और क्षेत्र में इसकी अस्थिर उपस्थिति का मुद्दा भी शामिल होगा तो हम इसका स्वागत करेंगे.'
उन्होंने आगे कहा, 'आप किसी ऐसे देश के साथ कोई समझौता कर रहे हैं जिसने ये कहा है कि वो इजरायल को खत्म करना चाहता है. स्पष्ट है कि ईरान अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को आगे रखना चाहता है, तो बातचीत करें, लेकिन किसी भी समझौते से पहले ये सुनिश्चित करें कि सौदा ठीक हो रहा है.'
टैमी ने कहा कि ईरान हिज्बुल्लाह और हमास को फंड कर रहा है ताकि उन्हें बम और रॉकेट बनाने और इजरायल के खिलाफ आतंकवादी हमले करने के लिए उकसाया जा सके.
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