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Israel Election 2026: नेतन्याहू की पार्टी ने की वोटिंग का समय बढ़ाने की मांग

SHIDDHANT
27 Oct 2026 10:13 PM IST
Israel Election 2026: नेतन्याहू की पार्टी ने की वोटिंग का समय बढ़ाने की मांग
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इजरायल में बंपर मतदान, सत्ता के लिए कड़ा मुकाबला
यरुशलम। इजरायल में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव के लिए मतदान जारी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने मतदान का समय बढ़ाने की मांग की है। देशभर में बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। कई स्थानों पर लंबी कतारें देखने को मिली हैं। यह 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद हुए गाजा संघर्ष के बाद इजरायल का पहला राष्ट्रीय चुनाव है।
नेतन्याहू की पार्टी ने क्यों की समय बढ़ाने की मांग?
प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उसकी सहयोगी शास पार्टी ने केंद्रीय चुनाव समिति से मतदान का समय रात 10 बजे के बाद तक बढ़ाने की मांग की है।
शास पार्टी ने अधिक मतदान और लंबी कतारों का हवाला देते हुए आशंका जताई कि कुछ मतदाता समय पर मतदान नहीं कर पाएंगे।
हालांकि, चुनाव समिति ने स्पष्ट किया है कि रात 10 बजे तक कतार में लग चुके सभी मतदाताओं को वोट डालने का मौका मिलेगा।
नेतन्याहू के सामने बेनेट और आइज़ेनकोट की चुनौती
इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइज़ेनकोट जैसे प्रमुख विपक्षी नेता हैं।
नेतन्याहू अपनी लिकुड पार्टी के नेतृत्व में सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर विपक्षी दल सरकार की सुरक्षा नीतियों और गाजा संघर्ष से जुड़े फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं।
गाजा युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे
इस बार चुनाव में गाजा संघर्ष, हमास के खिलाफ सैन्य कार्रवाई, राष्ट्रीय सुरक्षा, अनिवार्य सैन्य सेवा, न्यायिक सुधार और महंगाई महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
कब आएंगे चुनाव के नतीजे?
इजरायल में मतदान स्थानीय समयानुसार सुबह सात बजे शुरू हुआ। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक मतदान रात 10 बजे समाप्त होना है।
मतदान समाप्त होने के बाद एग्जिट पोल सामने आएंगे। हालांकि, अंतिम मतगणना 30 अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद है और आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को प्रकाशित किए जाएंगे।
यदि किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो नई सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन वार्ता लंबी चल सकती है।
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