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New Delhi. नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स (BRICS) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) बैठक के दौरान पश्चिम एशिया का तनाव अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुलकर सामने आ गया। बैठक में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधियों के बीच तीखी जुबानी टकराहट देखने को मिली। ईरान ने यूएई पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई में अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग किया था। हालांकि, यूएई ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में ब्रिक्स देशों के सुरक्षा प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की। इसी दौरान ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी डॉ. गदीर निजामीपुर ने अपने संबोधन में यूएई पर निशाना साधते हुए कहा कि हाल के महीनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में की गई सैन्य कार्रवाइयों का कुछ हिस्सा यूएई के क्षेत्र में स्थित ठिकानों से संचालित किया गया।निजामीपुर ने आरोप लगाया कि पूरी दुनिया ने देखा कि क्षेत्र में तनाव और संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इजरायल की आक्रामक नीतियों के कारण हुई। उन्होंने कहा कि इन हमलों में ईरान के नागरिक ढांचे, स्कूलों और अस्पतालों को भी नुकसान पहुंचाया गया। ईरानी प्रतिनिधि ने दावा किया कि यूएई ने इन हमलों की निंदा करने के बजाय अपनी भूमि का उपयोग सैन्य अभियानों के लिए होने दिया, जिससे वह अप्रत्यक्ष रूप से इस कार्रवाई का हिस्सा बन गया।
बैठक के दौरान ईरानी अधिकारी ने मानवीय नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने संघर्ष के पहले दिन ईरान के मिनाब क्षेत्र में मारे गए छात्रों की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि युद्ध और सैन्य कार्रवाई का सबसे बड़ा खामियाजा आम नागरिकों और बच्चों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे हमलों की निंदा करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की। ईरान ने यूएई से पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने का आग्रह भी किया। निजामीपुर ने कहा कि एक अच्छे पड़ोसी के रूप में यूएई को शांति, स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया पहले से ही कई संकटों का सामना कर रहा है और ऐसे समय में किसी भी देश को तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों से बचना चाहिए।
हालांकि, यूएई ने ईरान के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इससे पहले मई 2026 में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भी दोनों देशों के बीच इसी मुद्दे को लेकर विवाद सामने आया था। उस समय मतभेद इतने गहरे थे कि बैठक के बाद कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका था। विदेश मंत्रियों की बैठक में यूएई के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने ईरान के आरोपों को निराधार बताया था। उन्होंने कहा था कि यूएई किसी भी प्रकार की सैन्य आक्रामकता में शामिल नहीं रहा है और ईरान द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं। अल मरार ने यह भी कहा था कि 40 दिनों तक चले संघर्ष के दौरान स्वयं यूएई भी ईरानी हमलों और खतरों का सामना कर चुका है।
यूएई के मंत्री ने स्पष्ट किया था कि उनका देश अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी कानूनी, राजनयिक और सैन्य अधिकार सुरक्षित रखता है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि किसी भी तरह के आरोप, धमकी या शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने के लिए यूएई पूरी तरह सक्षम है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स NSA बैठक के दौरान सामने आया यह विवाद इस बात का संकेत है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अभी भी गहरा बना हुआ है। भारत की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक का उद्देश्य वैश्विक सुरक्षा, आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना है, लेकिन ईरान और यूएई के बीच बढ़ती तल्खी ने बैठक का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
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