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गगल-खड़ौता-मौहली में जांच तेज, एयरपोर्ट के पास नौ बेनामी सौदे बेनकाब
Shantanu Roy
27 Oct 2026 7:15 PM IST

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Hospice. धर्मशाला। कांगड़ा जिला में हुए कथित फर्जी भूमि सौदों और सरकारी जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। जांच की आंच अब केवल प्रॉपर्टी डीलरों या खरीदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी जांच एजेंसी के सीधे निशाने पर आ गए हैं। फर्जी कृषक प्रमाण पत्र बनाने और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर हिमाचल प्रदेश काश्तकारी एवं भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 का उल्लंघन करने के आरोप में विभाग के करीब दो दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका शक के घेरे में है। जिला के कांगड़ा, गगल एयरपोर्ट के नजदीक खड़ौता व मौहली सहित कई क्षेत्रों में जमीन के संदिग्ध लेनदेन की परतें खुल रही हैं। विशेष जांच दल एसआईटी ने गगल एयरपोर्ट के आसपास ही नौ संदिग्ध बेनामी सौदों का पर्दाफाश किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में स्पष्ट किया था कि इस फर्जीवाड़े में चार आपराधिक केस दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि चार अन्य मामलों में संबंधित उपायुक्तों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जांच का सबसे अहम बिंदु राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली है। विजिलेंस यह सवाल उठा रही है कि गैर-कृषकों द्वारा जाली प्रमाण पत्रों के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री, इंतकाल और जमाबंदी बिना विभागीय अधिकारियों की जानकारी के कैसे संभव हो गई। जांच में दस्तावेजों से जरूरी टिप्पणियां हटाने और बैंक खातों के जरिए संदिग्ध लेन-देन की बात सामने आई है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा और भी व्यापक होने वाला है। विजिलेंस संबंधित समय में तैनात रहे पटवारियों, कानूनगो और अन्य राजस्व अधिकारियों के रिकॉर्ड खंगाल रही है। जमीन सौदों में इस्तेमाल धनराशि के वास्तविक स्रोत और दस्तावेजों में किए गए बदलावों को जोडक़र पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जा रहा है। जांच के यदि अधिकारियों की मिलीभगत के ठोस सबूत मिलते हैं, तो गाज गिरना तय है।
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