
x
ED ने ठोस कदम उठाया
Gurugram गुरुग्राम। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने इंटरनेशनल टेक सपोर्ट स्कैम के एक बड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने 9 फरवरी 2026 के आदेश के तहत 90.21 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को प्रोविजनली अटैच (जब्त) कर लिया है। 10 फरवरी 2026 को गुरुग्राम की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (आरोप पत्र) दाखिल किया गया है। इस कंप्लेंट के बाद मुख्य साजिशकर्ता चंद्र प्रकाश गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया है।
ईडी की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) की दिल्ली आईओडी द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। जांच में पाया गया कि 2021 से 2024 तक दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में कई गैरकानूनी कॉल सेंटर चलाए जा रहे थे। इन कॉल सेंटरों में कर्मचारी खुद को माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों के अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाते थे। पीड़ितों को उनके कंप्यूटर पर नकली पॉप-अप अलर्ट दिखाकर डराया जाता था कि उनका सिस्टम हैक हो गया है। तकनीकी सहायता के नाम पर रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवाया जाता था, जिससे उनके बैंक खातों तक पहुंच बनाई जाती थी। पैसे हांगकांग स्थित खातों में ट्रांसफर कर दिए जाते थे।
अपराध की कमाई को पहले विदेशी बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट्स में ट्रांसफर किया जाता था, फिर हवाला चैनलों से भारत लाकर नकद में बदला जाता था। यह रकम फर्जी चालान और शेल कंपनियों के जाल के जरिए घरेलू बैंकिंग सिस्टम में लॉन्ड्र की जाती थी। मेसर्स सीएसपीआरओ टेक्नोलॉजी (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड को फ्रंट कंपनी के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिसमें चंद्र प्रकाश गुप्ता के पास 100 प्रतिशत शेयर थे।
मुख्य मास्टरमाइंड अभिनव कालरा, अर्जुन गुलाटी और दिव्यांश गोयल बताए गए हैं। चंद्र प्रकाश गुप्ता कॉल सेंटर के रोजाना काम संभालते थे, जिसमें कॉल मॉनिटरिंग, साजिशकर्ताओं से तालमेल और टेक्निकल सेटअप शामिल था। स्पेशल कोर्ट ने इन तीनों मुख्य आरोपियों के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किए थे, क्योंकि वे जांच से फरार थे।
ईडी की जांच में पाया गया कि 2022-2024 के दौरान इन तीनों को शेल कंपनियों से करीब 120 करोड़ रुपए मिले, जो उनकी आईटीआर में दिखाई गई आय से कहीं ज्यादा है। इस रकम से आलीशान घर, पेंटहाउस, 12 लग्जरी कारें, महंगी घड़ियां, आभूषण और अन्य संपत्तियां खरीदी गईं। आरोपी शानदार जीवन जी रहे थे, विदेशी यात्राएं कर रहे थे और चार्टर्ड प्लेन का इस्तेमाल कर रहे थे। ईडी ने बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, गवाह बयान और अमेरिकी एफबीआई से मिली जानकारी के आधार पर अपराध की कुल कमाई 274.93 करोड़ रुपए आंकी है। इसी के तहत 90.21 करोड़ की संपत्तियां अटैच की गई हैं
Tagsजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi newsगुरुग्राम स्कैमईडी कार्रवाईइंटरनेशनल टेक सपोर्टचंद्र प्रकाश गुप्तामनी लॉन्ड्रिंगपीएमएलएकॉल सेंटर फ्रॉडशेल कंपनीअमेरिकासंपत्ति जब्तीडिजिटल साक्ष्यअपराधी कमाईएफबीआई सहयोग
Next Story





