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पंजाब कांग्रेस के अंदर चल रही अंदरूनी खींचतान, भूपेश बघेल गुटबाजी नहीं सुलझा पाए

jantaserishta.com
12 July 2026 8:30 AM IST
पंजाब कांग्रेस के अंदर चल रही अंदरूनी खींचतान, भूपेश बघेल गुटबाजी नहीं सुलझा पाए
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नई दिल्ली: पंजाब कांग्रेस में छिड़ा अंदरूनी घमासान थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के खिलाफ बागी सुर अख्तियार कर चुके गुट और कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के बीच शनिवार को हुई बैठक बेनतीजा रही। चंडीगढ़ में हुई इस मैराथन बैठक में असंतुष्ट नेताओं की अगुवाई पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने की। कई घंटों तक चली इस माथापच्ची के बाद भी संकट का कोई तात्कालिक समाधान नहीं निकल सका। अब अंतिम फैसले की गेंद पार्टी आलाकमान के पाले में चली गई है।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब कांग्रेस आलाकमान ने हाल ही में राजा वारिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बनाए रखने का फैसला किया और चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी कांग्रेस के भीतर यह अंदरूनी खींचतान पार्टी की राह मुश्किल कर सकती है।
कपूरथला से विधायक राणा गुरजीत सिंह के चंडीगढ़ स्थित आवास पर हुई यह बैठक एक तरह से राजा वारिंग के विरोधी खेमे का बड़ा शक्ति प्रदर्शन थी। बैठक में वर्तमान और पूर्व विधायकों सहित करीब 92 नेता शामिल हुए, जो वारिंग को दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। इन नेताओं ने साफ तौर पर प्रभारी भूपेश बघेल से कहा कि वारिंग से उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, लेकिन अगर किसी समझौतावादी नेता के हाथ में कमान रही तो पार्टी की सत्ता में वापसी नामुमकिन है।
बैठक में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, राणा गुरजीत सिंह, सुखजिंदर सिंह रंधावा, संगत सिंह गिलजियां, अरुणा चौधरी, ओपी सोनी, परगट सिंह, तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवा और भारत भूषण आशू जैसे कद्दावर नेता शामिल थे। इस बंद कमरे की बैठक से ठीक पहले चन्नी ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट में लिखा, "इंतजार करिए और देखिए कि ऊंट किस करवट बैठता है।" बैठक के दौरान असंतुष्टों ने मौजूदा नेतृत्व पर तीखे सवाल उठाए और आशंका जताई कि वारिंग के पद पर बने रहने से आगामी चुनावों में कांग्रेस की संभावनाओं को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश अध्यक्ष राजा वारिंग ने बैठक में न जाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि उनकी अनुपस्थिति से नाराज नेताओं को बिना किसी संकोच या असहजता के अपनी बात खुलकर रखने का मौका मिलेगा। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मौजूद अधिकांश नेताओं ने एक सुर में वारिंग को पद से हटाने की मांग का समर्थन किया। नेताओं ने प्रभारी के सामने उन कथित वाकयों का ब्योरा भी रखा जहां वारिंग ने राज्यभर के नेताओं के बीच कथित तौर पर गुटबाजी और दूरियां पैदा करने का काम किया।
बैठक में चन्नी ने स्पष्ट किया कि उनकी खुद प्रदेश अध्यक्ष बनने की कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं है, वह सिर्फ पार्टी को दोबारा सत्ता में देखना चाहते हैं। इस एकजुटता पर कांग्रेस नेता बरिंदर ढिल्लों ने चुटकी लेते हुए कहा, "आप किसी एक नेता का नाम बताइए जो यहां मौजूद नहीं है। पूरी कांग्रेस पार्टी आज यहां है।"
कांग्रेस आलाकमान द्वारा इस संकट को टालने की जिम्मेदारी संभाल रहे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चन्नी गुट की शिकायतों को बेहद धैर्यपूर्वक सुना। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने नेताओं को स्पष्ट कर दिया कि नेतृत्व में बदलाव का फैसला करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने बागियों की चिंताओं और भावनाओं को आलाकमान तक पहुंचाने का भरोसा दिया। साथ ही नसीहत दी कि पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को मीडिया के सामने न लाया जाए।
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बघेल ने कहा, "मैंने सभी नेताओं से मुलाकात की और विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने विचार रखे और कुछ मुद्दे उठाए हैं, जिन्हें मैं आलाकमान के समक्ष रखूंगा। आलाकमान के फैसले से कोई भी नाराज नहीं है।" उन्होंने नेताओं को आश्वस्त करते हुए कहा, "सभी के हितों का ध्यान रखा जाएगा। किसी भी नेता को सिर्फ इसलिए नुकसान नहीं उठाना चाहिए क्योंकि उसे किसी बड़े नेता का समर्थन प्राप्त नहीं है। अगर किसी उम्मीदवार में जीतने की क्षमता है तो उसे टिकट जरूर मिलेगा।" हालांकि, बघेल ने मीडिया के सामने इस बात से इनकार किया कि बैठक में वारिंग को हटाने पर कोई चर्चा हुई।
बैठक खत्म होने के बाद पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि चर्चा बेहद सकारात्मक रही। उन्होंने कहा, "वार्ता के दौरान इस बात को स्वीकार किया गया कि कई बार पार्टी को अपने कुछ फैसलों को पलटना पड़ता है। हम पंजाब में कांग्रेस की सरकार चाहते हैं ताकि खराब कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों से निपटा जा सके। इसके लिए पार्टी में एकता जरूरी है, लेकिन हमें ऐसे नेताओं की जरूरत है जो पूरी ताकत और बेबाकी से जनता की आवाज उठा सकें। हमें समझौता करने वाले नेता नहीं चाहिए।"
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